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सांसद आदर्श गांव कैड़ा की पड़ताल

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सुरियावां। सांसद के आदर्श गांव कैड़ा में कुछ जटिल समस्याओं से निजात मिली है, मगर सड़क, नाले और नालियों के लिए ग्रामीण अब भी तरस रहे हैं। करीब चार साल गुजर गए पर जलभराव और जर्जर सड़क की समस्या ग्रामीणों के लिए मुश्किलों का सबब बनी हैं। वरुणा नदी पर रपटा पुल का आश्वासन अब तक पूरा नहीं हो सका।
2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनी तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों को एक-एक गांव को गोद लेकर विकास कराने पर जोर दिया। उसी क्रम में सांसद वीरेंद्र सिंह ने पहले ज्ञानपुर ब्लॉक क्षेत्र के कौलापुर और उसके बाद सुरियावां ब्लॉक के पिछड़े गांव कैड़ा को 2015-16 में गोद लिया। करीब तीन हजार की आबादी वाले इस गांव में 1980 मतदाता हैं। गांव में खारे पानी की समस्या सबसे जटिल रही है। इससे निजात के लिए यहां पर सांसद की ओर से आरओ प्लांट लगवाया गया। गांव में सौर ऊर्जा, विद्युतीकरण, शौचालय, सड़कों का निर्माण हुआ, लेकिन अब भी कई बस्तियां विकास से वंचित हैं। बहुता-चकडाही से कैड़ा संपर्क मार्ग की हालत दयनीय हो गई है। गांव की एक अन्य जटिल समस्या को लेकर अब तक कोई पहल नहीं हो सकी, जो जलभराव की है। नाली का निर्माण नहीं होने से बारिश के अलावा घरों से निकलने वाला गंदा पानी जगह-जगह भरा हुआ है। जल निगम की टंकी, रपटा पुल, सामुदायिक भवन आदि कार्य लंबे समय से प्रस्तावित हैं। सांसद निधि से कुछ सड़कें बनाई गई पर अब भी कई लंबित है।
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चार साल में बदली है कैड़ा की तस्वीर
ज्ञानपुर। सांसद प्रतिनिधि शैलेंद्र दूबे ने कहा कि अति पिछड़े गांव में शामिल कैड़ा गांव की तस्वीर चार साल में बदल गई। सोलर प्लांट से खारे पानी से निजात मिली। गांव को पक्के मार्ग से जोड़ा गया, एक-दो सड़क प्रस्तावित हैं। जल निगम की टंकी 90 फीसदी पूर्ण हो चुकी है। सोलर लाइट, आवास, शौचालय आदि कई बड़े कार्य हुए।
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- सांसद आदर्श गांव बनने के बाद कैड़ा में काफी कार्य हुए, हालांकि दलित बस्ती में संपर्क मार्ग का निर्माण नहीं हो सका।
जयचंद यादव
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- सीमावर्ती गांव कैड़ा काफी पिछड़ा था। सांसद के गोद लेने के बाद चार साल में कई महत्वपूर्ण कार्य हुए, जो सराहनीय है।
अजय कुमार सिंह
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- सांसद आदर्श गांव में आरओ प्लांट लगने के बाद खारे पानी से राहत मिली। संपर्क मार्ग, सोलर लाइट आदि लगवाए गए। सामुदायिक भवन, रपटा पुल न बनने से दिक्कत होती है।
डॉ. देवेश तिवारी
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- बिजली कनेक्शन तो ज्यादातर स्थानों पर हो गया, लेकिन अब भी जरूरत है। पाइप लाइन से गांव में हर जगह पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
नितेश तिवारी
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