ऊंज। विकास खंड डीघ में फैनी के खौफ का असर तीसरे दिन रविवार को भी लोगों में छाया रहा। सवा सौ गांवों में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था बहाल न हो पाने से लोगों में हाहाकार की स्थिति मची रही। वहीं रिहायशी घरों समेत खेत-खलिहानों में चक्रवाती तूफान से हुए नुकसान और मड़ाई कार्य बाधित पड़े रहने से न तो किसानों को ही राहत मिल सकी और न ही पीड़ित गरीब, मध्यम वर्गीय परिवारों को। बिजली कर्मचारी तार-खंभों को दुरुस्त करने में जुटे रहे।
गत शुक्रवार की देर शाम फैनी नामक चक्रवाती तूफान के साथ हुई बेमौसमी बारिश से सबसे अधिक नुकसान का सामना डीघ क्षेत्रवासियों को उठाना पड़ा था। अभी भी मौसम विभाग की ओर से सात मई तक असर प्रभावी रहने का संकेत लोगों को चैन नहीं लेने दे रहा है। हालांकि नुकसान से प्रभावित ग्रामीण और किसान दूसरे ही दिन से मलबों को हटाने-बढ़ाने में जुटे रहे। तूफान की जद में आकर जर्जर तार और खंभों के धराशायी हो जाने के कारण वहिदानगर उपकेंद्र से संचालित कटरा, सीतामढ़ी, अकोढ़ा, रमईपुर, नया अरता फीडरों पर बिजली की व्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ा गई थी जिसे विभाग तीन दिन बाद भी दुरुस्त कराने में पसीना छोड़ता रहा। हालांकि शनिवार की देर शाम मात्र दो फीडर नया अरता, अकोढ़ा के आधे क्षेत्र में ही आपूर्ति होने से लोगों को पेयजल सहित गर्मी से हलकान होकर रह जाना पड़ा। अकोढ़ा के नवधन, ऊंज, कुरमैचा आदि गांवों से जुड़े कनेक्शनधारकों को तीसरे दिन ही कुछ घंटे के लिए बिजली चालू कर विभाग शांत कराने के प्रयास में जुटा रहा। दरवांसी, रामकिशुनपुर-बसहीं, रजमला, गोलखरा, पकलोल, चंदापुर, सूफीनगर, मैलौना, सुधवैं, गोधना, दौरियाही, खेदौपुर, खरगापुर, मोन, सदाशिवपट्टी, कोइरौना बाजार, इटहरा, सीतामढ़ी, बारीपुर, तुलसीकला, मुंगरहा, मंगापट्टी, सुभाषनगर, बिछिया-बनकट आदि गांवों में आपूर्ति न हो पाने से नाराज लोगों का कहना रहा कि गत 15 वर्षों से विभाग जर्जर तारों को न बदलवाने के कारण हल्की बारिश और हवा विद्युत व्यवस्था को तार-तार करने में कसर नहीं छोड़ती। जब भी समस्या खड़ी होती है तब विभाग की ओर से टूट कर गिरने वाले तारों को ही जोड़ कर काम चलाने का हरसंभव प्रयास करता है। गौर किया जाय तो अभी तक जंगीगंज रेलवे स्टेशन समेत कई अन्य मार्गों पर तारों के गिरे रहने से खतरे की संभावना बनी हुई है। दर्जन भर से अधिक पेयजल समूह योजनाएं के ठप पड़ जाने से पीने का पानी भी मयस्सर नहीं हो पा रहा है। इस बात का भी ग्रामीणों में मलाल बना हुआ है कि तूफान की जद में आकर क्षतिग्रस्त हुए घरों, सामानों की भरपाई के लिए किसी भी स्तर से कोई कदम नहीं उठाया जाना आक्रोश का कारण बन चुका है। शीघ्र ही जिला प्रशासन स्थलीय निरीक्षण करा कर मुआवजा देना चाहिए।