ज्ञानपुर। बतौर प्रधानमंत्री पहली बार भदोही जिले में पहुंचे नरेंद्र मोदी ने जिले की जनता से भावनात्मक रिश्ता जोड़ने की कोशिश की। भाषण की शुरुआत सेमराधनाथ, हरिहरनाथ, सीता धाम और गंगा मइया के साथ ही 1857 की क्रांति के नायक झूरी सिंह और शीतल पाल के जिक्र से करते हुए उन्होंने हर वर्ग से जुड़ने की कोशिश की। कहा कि भदोही की हस्तनिर्मित कालीनों की वजह से आज भारत पूरी दुनिया में कालीन उत्पादन में नंबर वन हो गया है। मखमली कालीनों के लिए विश्वविख्यात कालीन नगरी भदोही में एक दशक के अंदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वैसे तो तीसरी बार आगमन हुआ। 2009 में डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय के समर्थन में जीआईसी के मैदान में सभा की थी, जबकि 2014 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह के समर्थन में चकपरौना में सभा को संबोधित किया, लेकिन बतौर पीएम वह पहली बार आए। प्रधानमंत्री ने सीधे जनता से जुड़ने का प्रयास किया। करीब 40 मिनट के भाषण की शुरुआत ज्ञानपुर स्थित सिद्धपीठ बाबा हरिहरनाथ, सेमराधनाथ और सीता समाहित स्थल सीतामढ़ी संग गंगा मइया से किया। उसके बाद 1857 में क्रांति का बिगुल फूंकने वाले शहीद झूरी सिंह और शीतल पाल का भी जिक्र किया। आधे भाषण के बाद भदोही और मिर्जापुर की हस्तनिर्मित कालीनों के बारे में अपनी बात रखी। कहा कि भदोही के बुनकरों की देन है कि हस्तनिमित कालीन के निर्यात में भारत अव्वल है। बुनकरों के लिए हित के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।