ज्ञानपुर। एक सप्ताह से किसानों की जल्दबाजी पर बृहस्पतिवार को देर शाम बारिश और तेज हवा ने उस समय ग्रहण लगाने का काम किया जब आसमान में छाए बादलों ने मौसम का मिजाज बिगाड़ कर तबाही का मंजर खड़ा कर दिया। झमाझम बारिश से 80 फीसद गेहूं की फसल खेत-खलिहान में भीग गई।
इस दौरात तेज आंधी और हवा में गरीब परिवारों के रिहायशी टिनशेड, कच्चे छप्पर उड़कर दूर जा गिरे जिससे काफी काफी नुकसान हुआ। मार्च के आखिरी सप्ताह के साथ ही अप्रैल की शुरुआत होने पर लघु, सीमांत किसानों में यह उम्मीद जग गई थी कि कड़ी मेहनत, कर्ज लेकर हुई गेहूं की फसल अब पूरी तरह से पककर तैयार है। इसके अलावा 10 फीसद किसानों ने ताकत झोंककर कटाई-मड़ाई के कार्य को निबटा भी लिया था। हालांकि अभी भी 90 फीसदी किसान इस तैयारी में थे कि एक-दो दिन में कटाई-बंधाई पूरी कर मड़ाई करा लिया जाएगा। किसान आफताब आलम, मो.नसीम ने बताया कि वह मड़ाई कराने के लिए सुबह छह बजे थ्रेसर बुलाया था लेकिन रात और सुबह हुई बरसात ने रोक दिया। राजकुमार, पमित सिंह, निर्भय, सुशील कुमार, शाश्वत सिंह, बिजई यादव, आशीष पासी, लल्लू गौतम, लालू यादव, दिनेश गौतम, सुनीता देवी, फुलवा वनवासी, राजू बिंद, बबलू यादव आदि ने कहा कि खेतों में खड़ी और काटकर, बोझ बांधकर छोड़ी गई फसल भीगने के चलते अब एक सप्ताह तक और इंतजार करना पड़ेगा। रामनिहोर, सुमित्रा देवी, भुगना देवी का दर्द रहा कि उनके टिनशेड, छप्पर के उड़ने से काफी नुकसान पहुंचा है।
गर्मी के मौसम में बुधवार की शाम और बृहस्पतिवार को सुबह हुई बारिश ने गांव से लेकर नगर तक की जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। नगर से होकर गुजरने वाले राजमार्ग समेत रेलवे स्टेशन, बाजार, बस स्टैंड पहुंचने वालों को जलमग्न और कीचड़ से सनी सड़कें आवागमन में व्यवधान डालती रहीं।
कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के मौसम विशेषज्ञ डा.सर्वेश बरनवाल ने बताया कि घट-बढ़ तापमान के कारण आंधी और बारिश का सामना किसानों को करना पड़ रहा है। आगामी एक सप्ताह तक विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। आगाह किया कि 24 घंटे के दौरान पश्चिम बंगाल की खाड़ी में 99 मिमी बरसात दर्ज हुई है। इससे यह अनुमान लग रहा है कि चक्रवाती तूफान के दबाव का असर रहेगा और जौनपुर, मिर्जापुर होते हुए बिहार की ओर बढ़ेगा। खेत में भीगने वाली गेहूं की फसल को हटाकर सुरक्षित स्थान पर रखा जाए। 12 से 13 अप्रैल तक छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा के हिस्सों में बारिश हो सकती है। इन दिनों दिन का तापमान 40 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच और रात का तापमान 22 से 23 डिग्री सेल्सियस हो रहा है। मई-जून तक तापमान का चरम पर पहुंचेगा। 43 से 44 डिग्री का तापमान तेज हवा चलने, आसमान में चमक-धमक, जानमाल के क्षति की संभावना अधिक रहती है। किसान भीगी फसलों को धूप में सुखाएं और दानों को नमीयुक्त भंडारण के लिए 10 से 12 फीसद धूप जरुर दि खाएं। मड़ाई का कार्य पूरा कर हरी खाद के रुप में ढैंचा, लोबिआ, उर्द, मूंग की बुआई कर सकते हैं।