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सैनिटाइज नहीं हो सके 80 फीसद गांव, संक्रमण का खतरा

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ज्ञानपुर। कोरोना वायरस को लेकर प्रशासन की ओर से भले ही सतर्कता बरती जा रही है, लेकिन गांवों की हकीकत अलग है। शासन-प्रशासन की सख्त हिदायत भी बेअसर साबित हो रही है। पखवारे भर बाद भी अस्सी फीसदी गांव सैनिटाइज नहीं हो पाए हैं। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
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कोरोना वायरस महामारी को लेकर हर कोई भयभीत है। सुरक्षा को लेकर शासन की ओर से हर रोज नए कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों की नजर गांवों की ओर नहीं पड़ पा रही है। लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन ने गांवों की ओर विशेष रूप से ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में दिक्कतें बढ़ सकती हैं। रेलवे स्टेशन मार्ग से लेकर ग्रामीण इलाकों को जोड़ने वाली अनेकों लिंक और संपर्क मार्ग जलनिकासी के अभाव में बजबजा रही है। लॉकडाउन में जन-जन को घरों में रहने, मास्क पहनने, गंदगी और भीड़ भाड़ से बचने, हर एक सामान लोगों तक पहुंचाने संबंधी हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर सर्वेक्षणीय अधिकारियों को भी तैनात किया है, लेकिन सर्वेक्षण अधिकारी अपनी ही जिम्मेदारी को भूल गए हैं। मामला चाहे ब्लॉक क्षेत्र डीघ का हो या फिर औराई, सुरियावां, भदोही, अभोली और ज्ञानपुर का। चहुंओर स्थिति नारकीय ही नजर आ रही है। ग्रामीणों ने अविलंब जिला प्रशासन से गांवों की गंदगी दूर कराकर संक्रमण से बचाने की आवाज उठाई है।
जनपद के सबसे अधिक क्षेत्रफल और गांव वाले विकास खंड डीघ में तैनात आशा बहुओं ने ग्राम प्रधान के संयुक्त खाते में आए 9.90 लाख रुपये का वारा-न्यारा सफाई और छिड़काव के नाम पर पचा तो दिया, लेकिन 99 गांवों का एक भी कोना स्वच्छता की भेंट नहीं चढ़ पाया है। लोगों ने आरोप लगाया है कि ब्लाक, डीपीआरओ, सीएमओ कार्यालय को भी भनक नहीं लग सकी है कि प्रतिवर्ष मिलने वाले 10 हजार रुपये में कहां सफाई हुई है और कहां ब्लीचिंग का छिड़काव हुआ। डीपीआरओ बालेश्धर द्विवेदी का कहना रहा कि ब्लॉक क्षेत्र के सभी गांवों में सफाई कराकर छिड़काव करा दिया गया है।
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