ज्ञानपुर/लालानगर। लोकसभा चुनाव को अब 10 दिन ही बचा है। ऐसे में प्रशासन को बूथों के हालात पर ध्यान देने की जरूरत है। अभी तो क्षेत्र में तमाम बूथ ऐसे हैं जहां पीने के पानी की भी व्यवस्था नहीं है। मतदान केंद्र पर शौचालयों की हालत इतनी खराब है कि इस हालत में उनका इस्तेमाल भी मुश्किल है।
जिले में 12 मई को छठवें चरण में मतदान होना है। इसके लिए जिले की तीन विधानसभाओं में 1293 बूथ बनाए गए हैं, जिस पर 11 लाख 53 हजार मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मतदान केंद्रों पर न्यूनतम छह सुविधाओं का होना निर्वाचन आयोग ने तय किया है। इसके तहत हर मतदान केंद्र पर शौचालय, पीने का पानी, बिजली, फर्नीचर, रैंप और चहारदीवारी जरूरी है। बूथों पर इन सुविधाओं की हालत क्या है इसे जानने के लिए सेक्टर और जोनल मजिस्ट्रेटों को क्षेत्र में दौड़ाया जा रहा है। अधिकांश बूथ या तो स्कूल या फिर पंचायत घर में बनाए गए हैं। इन बूथों की हालत को लेकर तैयार की जा रही रिपोर्ट में कई केंद्रों पर पीने के पानी और शौचालय की हालत बेहद खराब है। डीघ, सुरियावां और अभोली के इलाकों में 100 से अधिक ऐसे बूथ हैं जहां पानी और शौचालय की स्थिति ठीक नहीं है। उदाहरण के तौर पर गोपीगंज के दो बूथों पर नजर डाली जाए तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। गोपीगंज नगर के काली महाल स्थित प्राथमिक विद्यालय में छह बूथ बनाये गए हैं जिसमे तीन बूथ नए बिल्डिंग में और तीन पिछले काफी दिनों से निष्प्रयोज्य हो चुके भवन में। आलम है कि विद्यालय कैंपस में लगा हैंडपंप भी काफी दिनों से खराब चल रहा है। निष्प्रयोज्य भवन में विद्युत भी नही है। इसी प्रकार पूरे भगवत गांव स्थित पंचायत भवन जिसमें दो बूथ हैं, लेकिन भवन विद्युत नहीं है। खिड़कियां जीर्णशीर्ण अवस्था में है। बगल में ही नव निर्मित शौचालय भी अपने दुर्भाग्य पर आंसू बहा रहा है। इसी तरह डीघ के दरवांसी गांव के प्राथमिक विद्यालय में बने तीन बूथों की हालत भी राम भरोसे है। स्कूल परिसर में पेयजल की व्यवस्था नहीं है। यही नहीं कहीं रैंप नहीं है तो कहीं बिजली। कई बूथों की चहारदीवारी क्षतिग्रस्त है। मतदान से पूर्व सुधार न हुआ तो मुश्किलें बढ़ेंगी। उप जिला निर्वाचन अधिकारी राम सिंह वर्मा ने कहा कि सेक्टर और जोनल मजिस्ट्रेट ने निरीक्षण किया है। जिन बूथों पर समस्याएं है उसे जिला पंचायत राज विभाग के माध्यम से सही कराया जा रहा है।