सीतामढ़ी। महर्षि वाल्मिकी की तपोस्थली सीतामढ़ी में नौ दिवसीय मेले में बृहस्पतिवार को विभिन्न मानस मर्मज्ञों ने श्रीरामकथा सुनाई। डॉ. साधना त्रिपाठी शास्त्री ने कहा कि मन संसार की तरफ मुड़े तो बंधन और भगवान की तरफ मुड़े तो मुक्ति का साधन है। रामजी ने दुरासा और ताड़का का अंत किया। हमारे जीवन से भी जब दुरासा मिट जाए तो रामजी की प्राप्ति हो जाती है। आशा करना है तो रामजी से करें।
कानपुर से आईं डॉ. प्रज्ञा मिश्रा गार्गी ने भी कथा कही। उन्होंने कहा कि श्री रामचरित मानस को समस्त जनमानस तक पहुंचाने में माताओं का बहुत योगदान रहा। कहा राम कथा की रचना भगवान शिव ने की, लेकिन रामकथा जन-जन तक पहुंची माता पार्वती के कारण। कथा जो सकल लोक हितकारी, सोई पूछन चह सैलकुमारी। श्रृंगबेरपुर से आए संत संतोष दास जी महराज ने गिद्धराज जटायु प्रसंग पर अमृत वर्षा करते हुए कहा कि हमारे देश की संस्कृति अनुपम है। यहां एक बूढा पक्षी भी नारी की रक्षा करने के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग कर सकता है। यह भारतवर्ष की संस्कृति है। सीताधाम में श्री राम कथा में श्री राम अनुग्रह रामायणी ने सुंदरकांड की सुंदरता पर व्याख्या करते हुए कहा जीवन को सुंदर बनाना है तो सुंदरकांड को अपनाओ। कथा वाचक राम रसिक महराज ने कहा राम दशरथ के घर में आए और दशानन का संहार किया। मौनी बाबा ने कथा सुनाते हुए कहा कि श्री राम चरित मानस हमें जीवन जीने की कला सिखाता है।