ज्ञानपुर। जिले में परिवहन विभाग की नाक के नीचे जिले में एंबुलेंस का एक बड़ा अवैध नेटवर्क फल-फूल रहा है। इस साल मई से 23 सिंतंबर तक पांच महीने में 24 नए अस्पताल खुले हैं, लेकिन एक भी निजी एंबुलेंस पंजीकृत नहीं हुई है। आरटीओ दफ्तर में कुल 36 एंबुलेंस ही पंजीकृत हैं। वहीं, हकीकत में 60 से अधिक एंबुलेंस सड़कों पर धड़ल्ले से दौड़ रही हैं। यहां 104 अस्पताल उधार की एंबुलेंस पर चल रहे हैं। यहां कुल 140 अस्पताल और नर्सिंग होम पंजीकृत हैं।
जिले में सरकारी अस्पतालों की एंबुलेंस व्यवस्था भले ही दुरुस्त हो, लेकिन दूसरी तरफ निजी अस्पतालों और क्लिनिकों में एंबुलेंसों की हालत खस्ता है। अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन के दौरान एंबुलेंस होना अनिवार्य होता है या फिर किसी न किसी संस्थान से अटैच होना चाहिए, लेकिन कई निजी क्लिनिक ऐसे हैं, जिनके पास अपनी एंबुलेंस नहीं है। सूत्रों के अनुसार, बिना मानक के चल रही ज्यादातर निजी एंबुलेंस में न तो ऑक्सीजन की सुविधा है और न ही प्रशिक्षित स्टाफ होता है। चालक के सहारे मरीज को रेफर कर दिया जाता है। कई एंबुलेंस तो पुरानी वैन को मॉडिफाई कर बनाई गई हैं। यहां बोलेरो भी एंबुलेंस है, जो मानक के विरुद्ध है। मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाना किराया वसूलते हैं।
20 लाख की आबादी पर 58 एंबुलेंस
जिले की आबादी करीब 20 लाख है। जिला अस्पताल सहित 230 सरकारी और 140 निजी अस्पताल हैं। जिले में सरकारी 102 और 108 सेवा की 38 एंबुलेंस हैं। इसके अलावा पांच एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास कुल 43 एंबुलेंस हैं। वहीं, निजी 36 एंबुलेंस हैं, जो मरीजों को समय से अस्पताल पहुंचाती हैं। एआरटीओ कार्यालय में 28 अस्पतालों के नाम और आठ संस्थागत के नाम पंजीकृत हैं।
अस्पताल खुले 24, पंजीकरण एक का भी नहीं
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जनपद में इस साल एक मई से 23 सितंबर 2026 तक 24 नए अस्पताल खुले हैं। विभागीय टीम ने इनका निरीक्षण करके सत्यापन किया है। 23 अस्पताल 10 से 15 बेड वाले हैं। एआरटीओ से मिली जानकारी के अनुसार, इस दौरान एक भी एंबुलेंस का पंजीकरण नहीं हुआ है। सबसे अधिक अस्पताल भदोही, सुरियावां और गोपीगंज में खुले हैं।
सरकारी के फिटनेस में खेल, जांच में साहब फेल
जिले की सरकारी एंबुलेंस का आलम यह है कि वह समय पर चालू ही नहीं होती है। सावन में लालानगर टोल प्लाजा पर सड़क हादसे में एक कांवड़िया घायल हो गया। मौके पर खड़ी एंबुलेंस चालू नहीं हो सकी। मरीज को निजी वाहन से सीएचसी गोपीगंज में भर्ती कराया गया। वहीं, 2025 में जिला अस्पताल से मरीज रेफर किया गया। एंबुलेंस चालू नहीं हुई। दूसरी एंबुलेंस से मरीज को भेजा गया।
एंबुलेंस के पंजीकरण के नियम
स्वास्थ्य विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र, एंबुलेंस पंजीकरण के लिए सबसे पहले सीएमओ से एनओसी लेना अनिवार्य है।
वाहन का व्यावसायिक होना: निजी श्रेणी के वाहन को सीधे तौर पर एंबुलेंस नहीं बनाया जा सकता है। इसके लिए वाहन का कमर्शियल में रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है।
फिटनेस और सुरक्षा मानक: वाहन का एआरटीओ द्वारा विशेष फिटनेस टेस्ट किया जाता है, जिसमें देखा जाता है कि मरीज को ले जाने के लिए वाहन तकनीकी रूप से सुरक्षित है या नहीं।
लाइफ सपोर्ट उपकरणों का सत्यापन: वाहन के अंदर ऑक्सीजन, मरीज को लेटने की व्यवस्था, मेडिकल उपकरण आदि होने चाहिए।
जिले के सभी निजी अस्पताल का अनुबंध संस्था से कराया गया है। जरूरत पर मरीज को एंबुलेंस मिल सके। अनुबंध के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाता है। - डॉ. एसके चक, सीएमओ भदोही
एआरटीओ कार्यालय में आठ संस्थागत, 28 अस्पतालों के नाम एंबुलेंस पंजीकृत हैं। समय-समय पर अभियान चलाकर इन वाहनों की जांच की जाती है। - राम सिंह, एआरटीओ भदोही