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राम नाम की महिमा अपार

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जंगीगंज। सेमराध के गंगा घाट पर कल्पवास माह के उपलक्ष्य में चल रहे कथा प्रवचन में सोमवार को रायबरेली से पधारे संत अयोध्या प्रसाद मिश्र ने भावनृत्य के माध्यम से प्रवचन किया। कहा कि राम नाम जप से बढ़कर कोई भी साधना नहीं है। इस भगवन्नाम-जप की महिमा अनंत है। जिसके प्रसाद से शिवजी अविनाशी, एवं अमंगल वेशवाले होने पर भी मंगल की राशि हैं। परम योगी शुकदेवजी, सनकादि सिद्धगण, मुनिजन एवं समस्त योगीजन इस दिव्य नाम-जप के प्रसाद से ही ब्रह्मानंद का भोग करते हैं। भक्त शिरोमणि श्रीनारद, भक्त प्रह्लाद, ध्रुव, अम्बरीष, परम भागवत हनुमानजी, अजामिल, गणिका, गिद्ध जटायु, केवट, भीलनी शबरी- सभी ने इस भगवन्नाम-जप द्वारा भगवत प्राप्ति की है। नाम जाप का प्रभाव सूक्ष्म किंतु गहरा होता है। इस दौरान उन्होंने बताया की जब लक्ष्मण ने मंत्र जप कर सीताजी की कुटीर के चारों तरफ भूमि पर एक रेखा खींच दी तो लंकाधिपति रावण तक उस लक्ष्मण रेखा को नहीं लांघ सका। भगवान के नाम का जप सभी विकारों को मिटाकर दया, क्षमा, निष्कामता आदि दैवी गुणों को प्रकट करता है।
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उनके नाम के जप मात्र से दु:ख, चिंता, भय, शोक, रोग आदि निवृत होने लगते हैं। सुख-समृद्धि और सफलता की प्राप्ति में मदद मिलने लगती है। जिससे मनुष्य के अंदर शक्ति-सामर्थ्य प्रकट होने के साथ बुद्धि का विकास होने लगता है। मनुष्य के अनेक पाप-ताप भस्म होने लगते हैं। उसका हृदय शुद्ध होने लगता है तथा ऐसे करते-करते एक दिन उसके हृदय में भगवान का बिराजने लगते है।
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