जल संरक्षण के लिए जिले में चयनित 75 अमृत सरोवरों में 56 में सुंदरीकरण के कार्य शुरू हो गए हैं, लेकिन 19 सरोवरों के काम फाइलों के पेच में फंस गए हैं। उधर, कई ग्राम पंचायतों में सरोवरों के कार्य बहुत धीमी गति से हो रहे हैं। ऐसे में बारिश से पूर्व अमृत सरोवर को तैयार करना प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
जल संरक्षण की पहल वैसे तो वर्षों से हो रही है, लेकिन एक से डेढ़ दशक से काम में तेजी आई है। राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में दो हजार से अधिक छोटे और बड़े तालाब हैं। इनमें 800 से अधिक तालाबों का जीर्णोद्धार किया गया है। कई तालाब अतिक्रमण के शिकार होकर अस्तित्व भी खो चुके हैं। शासन ने एक एकड़ क्षेत्रफल में फैले तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। जिसमें से जिले के 75 तालाब चिह्नित किए गए हैं। बारिश से पहले तालाबों की खुदाई से लेकर जल निकासी आदि तक की सुविधा को पूर्ण करना है। सबसे पहले तालाब की खुदाई होगी और उसके चारों तरफ चबूतरा बनाया जाएगा। एक ऐसा हाल बनाया जाएगा, जहां गांव के लोग शादी भी कर सकें। अभोली ब्लॉक के सदौपुर, मसुधी, नीबी, अभोली सहित अन्य स्थानों पर अमृत सरोवर का काम शुरू हो गया है। सुरियावां, ज्ञानपुर, डीघ, भदोही और औराई में 19 अमृत सरोवरों का निर्माण कार्य अभी नहीं शुरू हो सका है। अमृत सरोवर बनाने में कम से कम 50 लाख रुपये खर्च होंगे। राज्य और केंद्रीय वित्त संग मनरेगा के मद से यह रकम खर्च की जाएगी। सुंदरीकरण संग विवाह के लिए एक हाल, सामुदायिक शौचालय, लाइटिंग की व्यवस्था, पौधरोपण सहित कई जरूरी सुविधाएं अमृत सरोवर के आसपास मिलेंगी। उपायुक्त मनरेगा राजाराम का कहना है कि अमृत सरोवर के निर्माण में बजट की कमी नहीं है। इसके तहत 56 सरोवरों के निर्माण का काम शुरू हो गया है। तकनीकी समस्याओं के कारण 19 सरोवरों का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। इसके लिए सभी बीडीओ को निर्देश दिए गए हैं।