भदोही। जर्मनी के हनोवर शहर में हुए चार दिवसीय डोमोटेक्स फेयर का सोमवार को समापन हो गया। शिरकत कर रहे कालीन निर्यातकों की मानें तो इस बार के फेयर से लोगों को भारी मायूसी हांथ लगी है। लोगों ने टेलीफोन पर बताया कि फेयर में खरीदारों की संख्या बहुत सीमित रही तथा जो रहे भी तो उनके नजरें कुछ अलग और सस्ते आईटम ढूंढ रही थी।
डोमोटेक्स के बारे में कहा जाता है कि भाग ले रहे लोगों को 3 से 6 महीने का काम मिल जाता है। और यदि कोई अच्छा ग्राहक मिल गया तो उससे अच्छा व्यवसायिक संबंध बन जाता है। लेकिन इस बार के फेयर से अधिकतर लोगों को मायूसी हुई है। बाबू सराय के निर्यातक अनुराग बरनवाल ने बताया कि फेयर में विजिटरों की आमद काफी कम रही। इसके चाहे जो कारण हो। आगे से भारी भरकम खर्च कर यहां आने से पहले सोचना पड़ेगा। दो दशक से हर साल फेयर में भागीदारी कर रहे शमीम अंसारी ने बताया कि डोमोटेक्स अधिकारियों ने विजिटरों को लेकर जो दावे किए थे वह फेल हो गए। चारो दिन अपेक्षा से कम ग्राहक आए जिससे व्यवसाय पर उम्मीदें टूटी हैं।
भदोही नगर के इम्तीयाज अंसारी ने बताया कि आयातकों की संख्या काफी कम रही। जो आए भी तो वे परंपरागत कालीनों से परहेज करते रहे। साथ ही कीमत बड़ा फैक्टर रहा। अन्य देशों के मुकाबले हमारे कालीन उन्हें महंगे प्रतीत हुए। जबकि शाहिद एकराम अंसारी ने बताया कि टर्की और चीन अपने निर्यातकों को भारी भरकम प्रोत्साहन देते हैं। जिससे वे काफी बड़े स्टाल लगाते हैं। चीन अथवा टर्की से प्रतिस्पर्धा करने के लिए भारत को भी आगे से इस पर विचार करना होगा।