ज्ञानपुर (भदोही)।
भगवान श्रीराम के लीला का मंचन वैसे तो सदियों पुराना है लेकिन आज भी जिले की कई रामलीलाओं का मंचन अपने आप में ऐतिहासिक है। ज्ञानपुर स्थित काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में 106 साल से हो रही रामलीला को रामनगर की तर्ज पर महाराजा काशी नरेश ने शुरू किया था। जिसे आज भी समिति बेहतर ढंग से संचालित कर रही है। इसमें सूबे के विभिन्न हिस्सों से कलाकार आते हैं।
त्रेता युग में भगवान विष्णु के अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम राम आज भी लोगों के लिए आदर्श हैं। त्रेता के बाद द्वापर और अब कलयुग चल रहा है, लेकिन प्रभु राम के आदर्शों को लोगों तक पहुंचाने के लिए आज भी रामलीला का मंचन हो रहा है। जिले में वैसे तो 500 समितियों के माध्यम से रामलीला का मंचन होता है, लेकिन ज्ञानपुर की रामलीला अपने आप में अलग रही है। 1911 में काशी नरेश का स्टेट जब अलग नहीं हुआ था, तब महाराज काशी नरेश ने रामनगर की रामलीला के सहोदर ज्ञानपुर में रामलीला की शुरुआत कराई। महाविद्यालय की खुर्शीद मंजिल के दक्षिणी मैदान पर रामलीला शुरू हुई। रामनगर की तरह यहां भी अतीत में लंका, अयोध्या, जनकपुरी, अशोक वाटिका समेत अन्य स्थल स्थापित रहे, हालांकि समय के साथ उक्त स्थानों पर कोर्ट समेत अन्य कार्यालय बन गए, जिससे उक्त स्थल विलुप्त हो गए। रामलीला समिति ज्ञानपुर के अध्यक्ष कैलाशपति शुक्ला ने बताया कि ज्ञानपुर की रामलीला में अयोध्या, वृंदावन, सोनभद्र, बिहार, हरियाणा समेत अन्य प्रांतों के कलाकार भाग लेते हैं।