भदोही। कालीन बुनकरों और मजदूरों पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाने के विरोध में बुधवार को होने वाले शांति मार्च की तैयारी पूरी हो गई है। बीते तीन दिन से कालीन मजदूरों के साथ-साथ कालीन कांट्रैक्टरों और निर्यातकों ने भी कड़ी मशक्कत की है। एकमा प्रतिनिधियों ने कहा कि कल के विरोध मार्च में जनपद के कोने-कोने से लोगों के अलावा मिर्जापुर से भी लोगों की भागीदारी होगी।
कालीन मजदूर असंगठित क्षेत्र के हैं। इसलिए उन पर 18 प्रतिशत जीएसटी थोपना कहीं से भी व्यावहारिक नहीं है। अगर इसे वापस नहीं लिया गया तो कालीन निर्माण प्रभावित होगा और लाखो बुनकरों, मजदूरों के सामने रोजीरोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। यह कहना है कि अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) के मानद सचिव पीयूष बरनवाल का। उन्होंने बताया कि यह आंदोलन भारत सरकार को 18 प्रतिशत जीएसटी हटाने पर पुनर्विचार करने को मजबूर कर देगा। विरोध मार्च को सफल बनाने के लिए मंगलवार को कालीन भवन में दिन भर बैठक होती रही। कालीन निर्यातक, मजदूर, कांट्रैक्टर आते जाते रहे। कार्यक्रम में मिर्जापुर, गोपीगंज, खमरिया, ज्ञानपुर, जंगीगंज, परसीपुर, नईबाजार, घोसियां, मिर्जामुराद, कुरौना, सर्रोई आदि से लोगों से आपसी मंत्रणा कर अधिक से अधिक लोगों के शामिल होने पर विचार किया गया।
विरोध मार्च को देखते हुए नगर के सभी कालीन प्रतिष्ठानों के बाहर जीएसटी के विरोध में बैनर लगाकर लोगों ने अपना समर्थन जताया है। इतना ही नहीं नगर के प्रमुख चौराहों, मार्गों को भी बैनरों से पाट दिया गया है। एकमा की ओर से शाम को मर्यादपट्टी में कालीन भवन के बाहर कार्यक्रम के लिए तंबू तैयार कराया गया है। लोगों की सहभागिता के लिए अलग-अलग जिम्मेदारी भी दी गई है। बैठक में गुलाम सर्फुद्दीन अंसारी, रवि पाटोदिया, शमीम आलम लल्लन, अशफाक अंसारी, एचएन मौर्य, अरशद वजीरी, वासिफ अंसारी, जेपी गुप्ता, हाजी अब्दुल हादी, मकसूद अंसारी, इम्तियाज अंसारी, आरिफ अंसारी, रजा खां, सैय्याज अंसारी, सुजीत जायसवाल, हाजी अब्दुल बारी, शाहिद अली आदि मौजूद रहे।
पांच हजार कालीन उत्पादक इकाइयां निष्क्रिय
भदोही (ब्यूरो)। जीएसटी के विरोध में बुधवार को होने वाले मार्च में शामिल होने के लिए कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के चेयरमैन महावीर प्रताप भी भदोही आ रहे हैं। उन्होंने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि पहली जुलाई से देशभर में लगभग पांच हजार कालीन उत्पादन इकाइयां निष्क्रिय हो गई हैं। न तो नए ऑर्डर लिए जा रहे हैं ना ही पुराने ऑर्डरों पर काम हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम से कालीनों की घरेलू बिक्री भी रोक दी गई है। अब तक एक हजार करोड़ का नुकसान कालीन उद्योग उठा चुका है। आने वाले दिनों में यदि जीएसटी पर सरकार ने पुनर्विचार नहीं किया तो मजदूरों का पलायन शुरू हो जाएगा। भदोही में सीईपीसी के पूर्व उपाध्यक्ष हाजी अब्दुल रब अंसारी और वरिष्ठ प्रशासनिक सदस्य उमेश कुमार गुप्ता मुन्ना ने कहा कि कालीन मजदूरों के इस आदोलन में सीईपीसी साथ है।