ज्ञानपुर। डीघ विकास खंड के कई गांवों में मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत चयनित लाभार्थी वनवासी परिवारों के खाते में प्रथम किस्त तो पहुंच गई, लेकिन लेखपालों के सुस्त रवैये से लाभार्थियों को भूमि का पट्टा नहीं दिलाया जा सका। यहां तक कि इस बारे में अब तक जिला प्रशासन को कोई प्रस्ताव ही भेजा जा सका। खाते में धनराशि पहुंचने की भनक लगते ही लाभार्थी ग्राम प्रधानों की चौखट पर लगभग रोज दस्तक दे रहे हैं। इससे उनकी चिंता बढ़ने लगी है। जबकि सेक्रेटरी आवास निर्माण में हो रही देरी पर परेशानी का भी सामना कर रहे हैं।
ग्राम प्रधान दरवांसी योगेंद्र सिंह बाबा ने बताया कि सामान्य लाभार्थियों की अपेक्षा वनवासी और बंजारा परिवारों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास के लिए चयनित कर पात्रता की सूची में डाला गया था। प्रधानमंत्री आवास के तहत लाभार्थी परिवारों को तो तो लाभान्वित करा दिया गया, लेकिन मुख्यमंत्री आवास के तहत पात्र कुछ परिवारों के खाते में प्रथम किस्त की धनराशि उपलब्ध होने से अब उनके समक्ष आवास बनाने का संकट खड़ा हो रहा है। जबकि शासन-प्रशासन की ओर से ऐसे परिवारों को भूमि का आवंटन कराकर निर्माण की व्यवस्था है। यही स्थिति अन्य गांवों में भी बनी हुई है। बताया कि बार-बार हलका लेखपाल, तहसीलदार और एसडीएम कार्यालय में भी पात्रों की सूची भेजकर भूमि आवंटन कराने की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई पहल नहीं हो सकी है। इस संबंध में उपजिलाधिकारी ज्ञानपुर अमृता सिंह का कहना है कि उनके पास अब तक कोई प्रस्ताव नहीं आया है। अन्य विकास खंड से जुड़े गांवों के प्रस्ताव पर पात्रों को लाभान्वित कराया जा चुका है। डीघ क्षेत्र के छूटे गांवों से प्रस्ताव मिलने पर लाभार्थियों को पट्टा दिलाकर आवास का निर्माण भी करा दिया जाएगा।