ज्ञानपुर। सुनने में अटपटा लगेगा, पर है सोलह आने सच। जिले की तीनों तहसीलों में राजस्व विभाग के अभिलेख में भले ही 650 बीघे की जमीन चारागाह के नाम दर्ज है, लेकिन हकीकत में 90 फीसदी स्थानों पर लोगों का कब्जा है। भूमाफिया पर सख्ती के लिए शासन के निर्देश पर गठित एंटी भूमाफिया टीम भी सिर्फ कागजी खानापूर्ति तक सिमट कर रह गई है। इससे सरकार की मंशा फलीभूत नहीं हो सकी।
सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद तालाब, चारागाह, सरकारी जमीनों से कब्जा हटाने की मुहिम शुरू हुई। इसके लिए तहसीलों में एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन भी किया गया। शुरुआती दिनों में गिने-चुने स्थानों पर प्रशासनिक कार्रवाई हुई और उसके बाद ढाक के पात वाली कहावत चरितार्थ हो गई। करीब डेढ़ साल से अधिक समय गुजरने के बाद भी जगह-जह जमीनों पर कब्जा जमाए भूमाफिया के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो 500 से अधिक तालाब जहां कब्जे की जद में हैं, वहीं तीनों तहसीलों में 650 बीघे चारागाह की जमीन भी धरातल पर नदारद है। सरकारी अभिलेख में ज्ञानपुर में 65 गाटा में 43.53 हेक्टेयर, औराई में 44 गाटा में 32.75 हेक्टेयर और भदोही में 199 गाटा में 88.60 हेक्टेयर चारागाह की जमीन है। एडीएम राम सिंह वर्मा ने कहा कि कब्जे के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। छुट्टा पशुओं के लिए चारागाहों को चिह्नित किया गया है। उसे जल्द ही खाली कराया जाएगा।
सरकारी जमीन कब्जाने में नेताजी आगे
ज्ञानपुर। जिले की तीनों तहसीलों में सरकारी जमीन कब्जाने के मामले में नेताजी भी पीछे नहीं है। सुरियावां में एक पूर्व विधायक सैकड़ों बीघे सरकारी जमीन पर जहां कब्जा जमाए हैं, वहीं औराई के बभनौटी में एक नेताजी के कुनबा भी तालाब और चारागाह की जमीन पर अवैध कब्जा किया है। एक पूर्व मंत्री तो कागजों में हेरफेर कर सरकारी जमीन को हथिया चुके हैं। इसमें सपा, बसपा, भाजपा और कांग्रेस समेत सभी दलों के नेता भी शामिल हैं।