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डोमोटेक्स में डिजाइन अवार्ड के लिए चार भारतीय डिजाईन नामित

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भदोही। एक बार फिर से भारतीय कालीन डिजाइन जर्मनी के डोमोटेक्स मेले में जलवा बिखेरने को तैयार है। अगले वर्ष 11 जनवरी से हनोवर शहर मेें होने वाले चार दिवसीय यह मेला पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। आयोजकों की ओर से हर वर्ष आठ श्रेणियों में बेस्ट डिजाइन अवार्ड प्रदान किए जाते हैं। इस वर्ष फाइनल दौर के लिए चयनित 24 डिजाइनों में से भारत की चार कालीन डिजाइनें भी नामित हुई हैं। जिनको लेकर भारतीय कालीन निर्यातकों की नजरेें डोमोटेक्स पर टिक गई हैं।
फ्लोर कवरिंग में डोमोटेक्स विश्व का सबसे बड़ा कालीन मेला माना जाता है। यहां हर वर्ष भारत से दो सौ अधिक कालीन निर्यातक भागीदारी करते हैं, जिसमें से 60 प्रतिशत निर्यातक भदोही कालीन परिक्षेत्र के होते हैं। भारतीय कालीन निर्यातक प्रतिद्वंद्वी देशों के कालीन निर्यातक देशों को अपने डिजाइनों, रंगामेजी और क्वालिटी में हमेशा से कड़ी टक्कर देते रहे हैं। इस बार के मेले में कारपेट डिजाइन अवार्ड के लिए ज्यूरी ने आठ श्रेणियों के अवार्ड के लिए जिन 24 डिजाइनों को फाइनल दौर के लिए नामित किया है। उनमें चार डिजाइनें भारतीय निर्यातकों के हैं।
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डोमोटेक्स पोर्टल के अनुसार बेस्ट डिजाइन अवार्ड के लिए 165 देशों से प्राप्त 233 कालीन डिजाइनों की एंट्री में से 24 को फाइनल दौर के लिए चयनित किया गया है। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद अलग अलग श्रेणी में जिन चार भारतीय कालीनों को जगह मिली है वे सभी जयपुर के कालीन प्रतिष्ठान हैं। जिनमे जयपुर रग्स के दो डिजाइनों के अलावा एक चौधरी एक्सपोर्ट और एक मंगलम आर्ट्स है। फाइनल दौर में नामित हो जाने के बाद कालीन निर्यातकों की निगाहें अब डोमोटेक्स पर टिक गई हैं जहां फेयर के दूसरे दिन 12 जनवरी को भव्य समारोह में डिजाइन पुरस्कारों की घोषणा की जाएगी।
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भदोही। पूर्व के वर्षों में भी डोमोटेक्स में भदोही के कालीन डिजाइनों का दबदबा रहा है। वर्ष 2014 में जहां गोपीगंज के संजय गुप्ता के डिजाइन ने अवार्ड जीता था तो वर्ष 2017 में नईबाजार के नुमान वजीरी के डिजाइन ने डोमोटेक्स में धूम मचाई थी। संजय गुप्ता ने कहा कि भारतीय कालीनों की गुणवत्ता हो या डिजाइन, उसका कोई मुकाबला नहीं है। यही कारण है कि डोमोटेक्स में भारतीय कालीनों की मांग अधिक रहती है। वर्ष 2017 में अवार्ड पाने वाले नुमान वजीरी ने कहा कि चाहे कपड़े का चलन हो या कालीन का। रंगामेजी और डिजाइन को लोगों के पसंद के अनुसार बदलते रहना चाहिए। इसमे भारतीय कालीन निर्माता अभ्यस्त हो चुके हैं।
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