भदोही। कालीन उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों व्यापारियों और निर्यातकों को प्रशिक्षित करने के लिए बुधवार को कालीन भवन में आयोजित में विशेषज्ञों ने विस्तृत जानकारी दी। डिजाइनिंग, भौगोलिक संकेतक, आनलाइन विक्रय समेत विदेश व्यापार से जुड़े बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए लोगों के सामने उनकी बारीकियों को रखा गया। सेमिनार में ऑनलाइन बिक्री के फायदे गिनाते हुए लोगों से ऑनलाइन उत्पाद बेचने पर जोर दिया गया।
अमेजन ई-कामर्स से आए अतिथियों वामसी पोथाला व अरुण कौल ने बताया ऑनलाइन बिक्री ने पूरी दुनियां को समेट दिया है। यह बेहद आसान और तीव्र गति से विकास करने वाला क्षेत्र है। कहा कि पूरी दुनियां में आनलाइन बिक्री लगातार बढ़ रही है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। कालीन और हस्तकला के क्षेत्र में भी ऑनलाइन विक्रय का लाभ उठाना चाहिए। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि खरीदार विश्व के किसी कोने मे हो उससे माल बेच पाना बेहद आसान होता है।
डिजाइनिंग विशेषज्ञ एनआईएफटीएस के संयुक्त निदेशक एसके झा ने बताया कि हस्तकला उद्योग में डिजाइनिंग की व्यापक भूमिका है। इससे ग्राहक केवल आपका होकर रह जाता है तथा आप मुंहमांगी कीमत वसूल सकते हैं, क्योंकि आपका डिजाइन कहीं और नहीं मिलेगा। पद्मश्री और जीआई विशेषज्ञ डॉ. रजनीकांत ने बताया कि भदोही के कालीनों को जीआई टैग हासिल होना इस क्षेत्र के लिए व्यापक महत्व का है। एक प्रकार से यहां के कालीनों को पूरे विश्व में मान्यता मिली है। उन्होंने इसके क्रार्यान्वयन पर जोर दिया।
महानिदेशक विदेश व्यापार कार्यालय से आए उप निदेशक अमित कुमार ने आयात-निर्यात नीति पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने भारत से माल विदेश भेजने समेत विदेशों से आयात करने के विभिन्न बिंदुओं पर प्रकाश डाला। इसके पूर्व अतिथियों का स्वागत ओएन मिश्र व रवि पाटोदिया ने किया। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के उपाध्यक्ष सिद्धनाथ सिंह ने भी संबोधित किया। मुख्य रूप से हरेंद्र प्रताप, हाजी अब्दुल हादी, राजाराम गुप्ता, हाजी शाहिद हुसैन, शिवसागर तिवारी, हाजी अब्दुल रब, पीयूष बरनवाल, एचएन मौर्य, उमाशंकर गुप्ता, जेपी गुप्ता, सुभाष गुप्ता, दिलीप गुप्ता, रामचंद्र यादव, आसिफ कमाल, नीरज बरनवाल, उमेश बरनवाल, फैयाज नवाब, राकेश कोठारी, शाहिद अली, राजू बोथरा, वाईके श्रीवास्तव, हरीश सहगल आदि मौजूद रहे।