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नहरों में पानी नहीं किसान बेहाल

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सीतामढ़ी/ऊंज। नहरों में पानी नहीं होने से गेहूं की बुवाई कर चुके किसान सिंचाई के लिए परेशान हैं। क्षेत्र में 15 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे में नहरों से ही सिंचाई होती है।
नहरों के संचालन के बेतरतीब रोस्टर ने जिले में गेहूं की खेती पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। समय पर पानी नहीं मिलने से पलेवा से लेकर पहली सिंचाई तक का काम पिछड़ रहा है। इससे गेहूं की पैदावार पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। रबी सीजन में ज्ञानपुर मुख्य नहर से पूर्वांचल के भदोही, इलाहाबाद, मिर्जापुर और वाराणसी जिलों के हजारों किसानों की 15237 हेक्टेयर (लगभग 62 हजार बीघे) कृषि भूमि की सिंचाई की जाती है। इसमें 10 हजार हेक्टेयर के आसपास रकबा अकेले भदोही जिले में है। गेहूं बुवाई का सही समय 15 से 25 नवंबर तक माना जाता है। जबकि पिछैती बुवाई का समय 26 नवंबर से 25 दिसंबर तक माना जाता है। इसका संज्ञान शायद प्रशासन और नहर विभाग को नहीं है। शायद यही वजह है कि नवंबर की शुरुआत से ही बंद हुईं नहरों में अब तक पानी नहीं छोड़ा गया है।
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विभाग के रोस्टर के मुताबिक 26 दिसंबर से नहर में पानी छोड़ा जाएगा। तब तक पिछैती बुवाई का समय भी निकल जाएगा। जबकि बड़ी संख्या में किसान खेत का पलेवा भी नहीं कर पाए हैं। पुरानी नमी के दम पर जिन किसानों ने गेहूं की बुवाई कर दी थी, वे भी सिंचाई को लेकर चिंतित हैं। नहर के रोस्टर को देखते हुए माना जा रहा है कि किसानों को गेहूं की बुवाई के लिए खेतों को पलेवा करने के लिए भी परेशान होना पड़ेगा। किसानों का कहना है कि जब मुख्य फसल गेहूं की बुवाई के लिए समय पर पानी ही नहीं मिल पाएगा तो पैदावार प्रभावित होगी। ज्ञानपुर पंप नहर परियोजना से रबी के सीजन में चारों जनपदों के किसानों की 15 हजार 237 हेक्टेयर रकबे की सिंचाई होती है, लेकिन रोस्टर में गड़बड़ी से किसानों को सिंचाई के लिए खून के आंसू रोना पड़ रहा है।

रोस्टर के मुताबिक 26 दिसंबर से नहरों में पानी छोड़ा जाएगा। उसके बाद कोई समस्या नहीं होगी। मौजूदा समय में नहरों की साफ सफाई का कार्य चल रहा है, ताकि पानी चलने के दौरान समस्या न हो। --केदार नाथ जायसवाल, अधिशासी अभियंता नहर
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गेहूं की बुवाई 15 नवंबर से शुरू होनी चाहिए और 21 दिन बाद पहली सिंचाई की जानी चाहिए। ऐसे में ज्ञानपुर नहर परियोजना पर आश्रित किसानों को न तो पलेवा और न ही अगैती गेहूं की सिंचाई के लिए पानी मिल जाएगा। - यादवेंद्र सिंह एडीओ कृशि विभाग
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