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धनुष यज्ञ का मेला

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मोढ़। मिथिला में भगवान श्री राम के धनुष तोड़ने के बाद बुधवार को राम विवाह की धूम मची। माता सीता ने राम जी को वरमाला पहनाकर पति के रूप में वरण किया तो समूचा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट और जयकारे से गूंज उठा। मेला देखने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंचे थे। इस दौरान तीतल की लड़ाई और सर्कस-झूला लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।
मोढ़ क्षेत्र के धनुष यज्ञ की बारी में प्रति वर्ष आयोजित होने वाले ऐतिहासिक धनुष यज्ञ मेले में बुधवार को भारी भीड़ उमड़ी। छह दिनी मेले का मुख्य आकर्षण पांचवें दिन राम विवाह के साथ शवाब पर आ जाता है। इसके बाद अंतिम दिन खिचड़ी की रस्म अदायगी के साथ ही बारात की विदाई कर दी जाती है और मेले का समापन हो जाता है। मुख्य मेला अगहन माह की पंचमी को श्री रामचंद्र के विवाह के साथ शुरू होता है, जो बुधवार को संपन्न हुआ। अगहन माह के प्रथम दिन पड़ोसी गांव महरभा, जिसको अयोध्या माना जाता है, वहां श्रीराम का जन्म होता है। दूसरे दिन मेला की बारी में सरई की प्रथा होती है। तीसरे दिन बारी फुलवारी, चौथे दिन धनुष टूटने की रश्म होती है, पांचवें दिन राम विवाह और छठवें दिन खिचड़ी की प्रथा के बाद श्री रामचंद्र और माता सीता की विदाई कराकर अयोध्या रूपी महरभा गांव चले जाते हैं। इस दौरान सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस क्षेत्र भ्रमण कर रही थी। मेले की खासियत यह है कि इसमें व्यापारी 10 दिन पहले से आकर टेंट की व्यवस्था में जुट जाते हैं। इस दौरान सर्कस, झूला भी पहले से आकर बनने लगते हैं। बृहस्पतिवार को खिचड़ी की रस्म अदायगी के बाद मेले का समापन हो जाएगा।
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महिलाओं के लिए सजी मीना बाजार
मोढ़। धनुष यज्ञ मेले में बुधवार को मेले के विविध आकर्षण के बीच महिलाओं के लिए मीना बाजार लगी। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं अपनी जरूरत और साज-सज्जा के सामान खरीदती दिखीं। मेले में दूरदराज से मिठाइयों की दुकानें आईं थीं। वहीं सर्कस और झूला का आनंद लेने के साथ ही बच्चे और युवा छोला और फुल्की का लुत्फ उठा रहे थे।
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