भदोही। कालीन निर्यातकों को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) टैक्स क्रेडिट के रूप में प्राप्त हो जाएगा। इसके बाद भी कालीन उद्योग पर जीएसटी थोपे जाने को लेकर उद्यमियों में उलझन है। कहा जा रहा है कि इससे उनकी समस्या बढ़ी है। यह सवाल भी किया जा रहा है कि कालीन बुनकर, मजदूर असंगठित क्षेत्र में आते हैं। सरकार ने उन्हें जीएसटी के दायरे में लाकर मजदूरों के साथ अन्याय किया है। नगर के काती व्यवसायियों का कहना है कि वे जीएसटी को अपना तो रहे हैं, लेकिन इसका असर उद्योग पर पड़ेगा।
आल इंडिया कारपेट यार्न स्पिनर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन (एसिसडा) के मानद सचिव, संतोकचंद गोलछा ने कहा कि कालीन बुनकरों और मजदूरों को सेवा क्षेत्र से बाहर रखना चाहिए था। ऐसा नहीं हो सका। कहा कि छोटे मझोले व्यापारी भी जीएसटी के दायर में आ गए हैं। बड़े व्यापारियों के पास पहले से ढांचागत व्यवस्था है। उन्हें तो दिक्कत नहीं होगी, लेकिन छोटे दुकानदारों की समस्या बढ़ेगी। कपड़े के दुकानदार सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि अब तक हम लोग इक्साइज ड्यूटी देकर माल उठाते थे। लेकिन, जीएसटी के तहत जो व्यवस्था है उससे हमारे ऊपर काम का बोझ बढ़ गया है। इसके लिए हम तैयार नहीं थे। अभी भी भ्रांतियों से हम घिरे हैं। कहा हम लोग 20 लाख से कम टर्नओवर वाले व्यापारी हैं।
इलेक्ट्रानिक्स शोरूप स्वामी गया प्रजापति ने बताया कि हम लोगों को कोई दिक्कत नहीं है। जीएसटी देकर माल उठाना पड़ेगा और जीएसटी लगाकर माल बेचना पड़ेगा। इसमें लागू करने में कुछ समस्याएं जरूर बढ़ेंगी, लेकिन यह कुछ समय के लिए होगा। कुछ महीनों में जब भ्रांतियां दूर होंगी तो स्थिति सामान्य हो जाएंगी। काती व्यवसायी इम्तियाज अंसारी ने कहा कि काती व्यवसायियों को भले ही दिक्कत न हो, लेकिन कालीन उत्पादन पर इसका असर पड़ सकता है। कालीन उद्योग प्रभावित होगा तो हमारा व्यवसाय भी प्रभावित होगा। कालीन बुनकरों और मजदूरों को कर दायरे में लाना ठीक नहीं है।
नहीं पड़ेगा काती की कीमतों पर असर
भदोही। काती व्यवसायी बीआर बत्रा ने कहा कि जीएसटी से उलेन यार्न की कीमतों पर विशेष फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि गैर प्रांतों से माल भदोही लाने के लिए अब जो तरह तरह के फार्म की आवश्यकता पड़ती थी, वह नहीं होगी। इसके अलावा पहले भी हम तरह तरह टैक्स चुका कर माल भदोही लाते थे। अब वह नहीं लगेगा और एकमात्र जीएसटी देकर माल ला सकेंगे। कहा कि जीएसटी लगाकर माल बेचना है। थोड़ी अड़चन उत्पादकों को हो सकती है। जो समय बीतने के साथ सामान्य हो जाएगा। बताया कि मैनमेड फाइबर पर जीएसटी अधिक है इसका कालीन कीमतों पर असर पड़ सकता है। हलांकि यह आने वाला समय बताएगा।