संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पशु तस्करों का नेटवर्क गांव-गांव तक फैला हुआ है। छुट्टा पशुओं से आजिज ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी अब आंख मूंदने लगे हैं। इसलिए तस्करों को इसमें और भी आसानी हो रही है।
चौंकाने वाली बात यह है कि कम उम्र के युवाओं को तस्करों ने गिरोह में शामिल कर लिया है, जो इसे मोटी और आसानी से कमाई का जरिया मानने लगे हैं। उनका काम छुट्टा पशुओं को एकत्र कर तस्करों को सूचित कर देना भर नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर अगर ग्रामीणों ने उन्हें पकड़ लिया तो बीच-बचाव कर छुड़ाते भी हैं।
बृहस्पतिवार को मुठभेड़ में पकड़े गए एक तस्कर ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि उनके लोग गांव के सूनसान क्षेत्र में छुट्टा अथवा सस्ते दाम पर पशुओं को खरीदकर एक जगह बांध देते हैं और तस्करों को इसकी खबर कर देते हैं। अनुकूल समय पर तस्कर गाड़ी लेकर पहुंचते हैं और पशुओं को लादकर बिहार भेज देते हैं। इसके बदले उन्हें हाथों-हाथ मोटी रकम मिल जाती है।
पिछले एक वर्ष में कलवारी, छावनी, परशुरामपुर सहित कई क्षेत्रों में पुलिस लावारिस बंधे पशुओं को मुक्त करा चुकी है।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कुछ साल पहले तक बूढ़े, अनुपयोगी पशुओं को तस्कर सस्ते दामों पर खरीदकर ले जाते थे। मगर, गोवंश पर प्रतिबंध के बाद छुट्टा पशु बिना कीमत अदा किए मिल जा रहे हैं। इसलिए तस्करों को बिना पूंजी का धंधा करने का मौका मिला हुआ है।
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