eहादेवा चौराहे पर लगी बाजार में आलू की सजीं दुकानें। संवाद
बनकटी। सब्जियों में सभी का पसंदीदा आलू पर भी धंधेबाजों की काली नजर पड़ गई है। क्षेत्र में लगने वाले बाजार पाकरडाड़, महादेवा, देईसाड़, बनकटी, बानपुर आदि बाजारों में धंधेबाज आलू को गेरू और एथिलीन से पुराने सफेद आलू को रंग कर लाल आलू बताकर अधिक दामों पर बेच रहे हैं।
महादेवा चौराहे पर बृहस्पतिवार को लगी बाजार में आलू का एक दुकानदार सफेद आलू को कैमिकल से लाल करते दिखा। पूछने पर वह गोलमोल जवाब देने लगा। वहीं रहने वाले राजेंद्र प्रसाद शुक्ल, जगदंबा शुक्ला, बलिराम मौर्य ने बताया कि 70 प्रतिशत आलू दुकानदार रंग कर बेच रहे हैं। डाॅ. जेपी चौधरी ने बताया कि कैमिकल युक्त आलू खाने से लिवर पर असर पड़ता है।
एक व्यापारी ने नाम न छपने की शर्त पर बताया कि आलू को अमोनिया के पाउडर और बालू में मिले मिश्रण में रखकर जूट के बोरे से रगड़ने पर कुछ ही घंटों में उसका छिलका हट जाता है। उसकी जगह पतली परत से छिलके निकलने लगते हैं। व्यापारी इसे पहाड़ों से आया सफेद आलू बताकर बेचते हैं।