विक्रमजोत क्षेत्र में भरथापुर व अन्य गांवों के करीब पहुंचा बाढ़ का पानी।
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सरयू के बढ़ते जलस्तर से सहमे ग्रामीण
विक्रमजोत (बस्ती)। बारिश के चलते बढ़ते जलस्तर और गांव से सटकर बह रही सरयू नदी की धारा को देख विक्रमजोत के तटबंध विहीन कटान आपदा प्रभावित गांव के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बृहस्पतिवार को नदी का जलस्तर खतरे के निशान 92.730 मीटर से छह सेंटीमीटर नीचे 92.670 मीटर पर रिकार्ड किया गया।
ग्रामीणों का कहना है यदि धारा के रास्ते को बदलने व कटान रोकने के लिए बने डैंपनरों व ठोकरों को मजबूत नहीं किया गया तो जल्द कटान का भयानक मंजर देखने को मिलेगा। गांव के अस्तित्व पर संकट बढ़ जाएगा। केंद्रीय जल आयोग की जारी जलस्तर के बढ़त की रफ्तार से आशंका जताई जा रही है कि शुक्रवार देर रात जलस्तर खतरे के निशान को पार कर सकता है।
वहीं, बढ़ते जलस्तर से नदी का दबाव लोलपुर-विक्रमजोत तटबंध पर बढ़ने लगा है। तटबंध विहीन गांव भरथापुर, कल्यानपुर, पड़ाव, चानपुर, संदलपुर में नदी की धारा का दबाव बढ़ने लगा है। गांव के प्रधान प्रतिनिधि अभिषेक शर्मा, हेमंत पांडेय, जग्गा सिंह, नन्हे सिंह, संजय सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पिछले साल से इस वर्ष अगस्त महीने में नदी का बहाव बढ़ने से दो साल पहले का मंजर याद कर लोगों के मन में दहशत बढ़ गई है। मौजूदा समय में नदी गांव से सटकर बहने लगी है। नदी से कुछ दूरी पर बसे आशियानों को खोने व सड़क पर आने के डर से लोग सहमे हुए हैं। बाढ़ खंड के जेई आरके नायक का कहना है कि डैंपनर व लांचिंग एप्रन का बैठना एक प्रक्रिया है जिससे घबराने की जरूरत नहीं है। कटान रोकने के लिए पर्याप्त उपकरणों की व्यवस्था कर ली गई है। जहां भी दिक्कत महसूस की जाएगी, कटान रोधी कार्य शुरू करा दिया जाएगा। पूरे आपदा प्रभावित व संवेदनशील जगहों की निगरानी की जा रही है।