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Basti News: कामर्शियल सिलिंडरों के दाम बढ़ने से व्यापारी हताश

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बस्ती। 19 किलो वजन वाले कामर्शियल सिलिंडर और छोटे सिलिंडर के दाम में अप्रत्याशित वृद्धि से एजेंसियों की बल्ले-बल्ले हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि पिछले एक महीने से 19 किलो के कामर्शियल सिलिंडरों को डंप किया जा रहा था। आपूर्ति विभाग से आदेश कराने के बाद भी उपभोक्ताओं को यह सिलिंडर देने में कटौती की जा रही थी। पहले से डंप कामर्शियल सिलिंडर अब बढ़े हुए दामों पर बेचकर एजेंसी संचालक अच्छा मुनाफा कमाएंगे। वहीं होटल, रेस्टोरेंट, फास्टफूड एवं चाय के बड़े-छोटे कारोबारी हताश हो गए हैं।
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खीरीघाट के रहने वाले रामेंद्र कुमार ने कहा कि शादी- विवाह के आयोजन के लिए प्रार्थना पत्र देने पर आपूर्ति विभाग से पांच कामर्शियल सिलिंडरों देने के आदेश किया जा रहा है। मगर एजेंसियाें पर पहुंचने के बाद बड़े मुश्किल से दो या तीन सिलिंडर मिल रहा है। बाकी सिलिंडर नहीं दिया जा रहा है। गौर के राम शंकर ने बताया उनके प्रार्थना पत्र पर पांच सिलिंडर देने का आदेश डीएसओ स्तर से हुआ था लेकिन, दो सिलिंडर दिया गया। इसी तरह एक महीने से एजेंसी संचालक कामर्शियल सिलिंडर में कटौती करते आ रहे हैं। जबकि विभाग का कहना हैं कि जरूरत के हिसाब से कंपनियों में डिमांड भेजकर कामर्शियल सिलिंडर की आपूर्ति कराई जा रही है। ऐसे में कामर्शियल सिलिंडरों में कटौती कर इसे डंप किया जा रहा है। आवेदकों का कहना हैं कि एजेंसी संचालकों को पहले से ही आभास था कि कामर्शियल सिलिंडर का दाम बढ़ने वाला है। इसीलिए सिलिंडर डंप किए गए हैं। अब इन सिलिंडरों को बेचने पर सीधे 993 रुपये का मुनाफा होगा। इसके अलावा कालाबाजारी करने पर यह सिलिंडर चार हजार की जगह पांच हजार में बिकने लगेगा। इसमें सीधे दोगुने का मुनाफा होगा।

होटल कारोबारी हुए निराश
कामर्शियल सिलिंडर के दाम वृद्धि होने से होटल, रेस्टोरेंट एवं चाय, फास्टफूड के छोटे- बड़े सभी कारोबारी निराश है। कोतवाली रोड पर चाय की दुकान चलाने वाले लल्लू ने बताया दुकान पर सिलिंडर की खपत ज्यादा रहती है। पहले 2300 रुपये में मिलने वाला कामर्शियल सिलिंडर ही महंगा पड़ता था। अब यह लगभग 3100 रुपये में मिलेगा। ऐसे में दुकान पर खाद्य पदार्थों की पुराने मूल्य पर बिक्री परता में नहीं आएगी। चाय, समोसा, नमकीन आदि का दाम बढ़ाना मजबूरी होगा। वहीं रमेश यादव ने कहा कि हर सामान पहले महंगा है। ईधन भी काफी महंगा हो गया है। ऐसे में मिठाई, चाय, समोसा के दाम एक दो दिन में बढ़ सकते हैं। क्योंकि इन्हें तैयार करने में लागत ज्यादा आएगी। लकड़ी भी 12 से 15 रुपये किलो मिल रही है। पहले इसकी कीमत आठ रुपये किलो थी। भट्ठी पर खाद्य सामग्री तैयार करना भी महंगा पड़ रहा है।
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ग्राहकों पर बढ़ेगा महंगाई का बोझ
होटल कारोबारी राम प्रकाश कहते हैं कि कामर्शियल सिलिंडर से होटल, रेस्टोरेंट में भोजन आदि तैयार किए जाते हैं। इसकी कीमत में अप्रत्याशित उछाल आने से भोजन, नास्ता आदि खाद्य पदार्थों की कीमत बढ़ानी बढ़ेगी। वहीं ढाबा संचालक राम सुभग ने बताया कि भट्ठी और गैस चूल्हा पर खाद्य पदार्थ तैयार करने में ईंधन की एक ही लागत लगभग आ रही है। ऐसे में ग्राहकों पर महंगाई का बोझ बढ़ना तय है। हम लोग दाम बढ़ाने के लिए विवश है। वरना परता ही नहीं पड़ेगा।

घरेलू सिलिंडरों में भी अधिक रकम की वसूली
रसोई गैस एजेंसियों पर घरेलू सिलिंडरों की बिक्री पर भी अधिक रकम वसूल की जा रही है। उपभोक्ताओं का कहना हैं कि 976 रुपये में होम डिलीवरी की सुविधा मिलनी चाहिए। मगर एजेंसियों पर पहुंचकर लाइन लगानी पड़ रही है। फिर टोकन मिलने के बाद गोदाम पर जाना पड़ रहा। उपभोक्ता खुद अपना सिलिंडर लेने के लिए गोदाम पहुंच रहे हैं। इसके बाद 1000 रुपये प्रति सिलिंडर कीमत वसूल की जा रही है। यानी प्रति सिलिंडर उपभोक्ताओं से 75 रुपये अधिक वसूले जा रहे हैं। यह एक तरह से नियम में शामिल हो गया है। इसके अलावा कालाबाजारी करके यहीं सिलिंडर दो हजार रुपये में बेचा जा रहा है। उपभोक्ताओं का कहना हैं कि अधिकांश एजेंसियां टोकन प्राप्त उपभोक्ताओं के हक के सिलिंडर में कटौती कर रही है। इसे बाद में कालाबाजारी कर दिया जा रहा है।

रसोई गैस के दाम में इजाफा शासन स्तर का नीतिगत मसला है। स्थानीय स्तर पर कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। उपलब्धता के हिसाब आम उपभोक्ताओं में कामर्शियल और घरेलू सिलिंडरों का वितरण भी कराया जा रहा है।
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विमल कुमार शुक्ल, डीएसओ।
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