- गर्मी में नेपाल की वादियों में बड़ी संख्या में जाते हैं लोग, अनजान जगहों पर जान का खतरा
- झील और झरना से गिरता हुआ पानी को देखकर उतर जाते हैं, गहराई पता न होने से डूबने से हो जाती है मौत
सिद्धार्थनगर। गर्मी चरम पर है और इससे निजात पाने के लिए लोग पहाड़ की ओर रुख कर रहे हैं। इस भीषण गर्मी से कुल पल सुकून के लिए सुंदर वादियों, झील और झरना देखकर लोग पानी में उतर जाने से परहेज नहीं कर रहे हैं। जगह, गहराई और बहाव की गति से अनजान नवयुवकों को जबतक बात समझ में आ रही है, तब तक देर हो जा रही है। ऐसे में जान का जोखिम बढ़ रहा है और कई बार जान तक चली जा रही है।
जनपद मुख्यालय के जगदीशपुर ग्रांट गांव निवासी सौरभ रस्तोगी के साथ भी ऐसा ही हुआ। वह दोस्तों के साथ नेपाल में घूमने के लिए गया था। नेपाल के पाल्पा जिले के दोभान में झरना देखने के बाद सभी दाेस्त वहां रुक गए। झरने और उसके पानी की रफ्तार के बारे में सही जानकारी न होने से वह गहरे पानी में चला गया। इस हादसे में उसकी जान चली गई। सौरभ का मामला इकलौता नहीं है। हर साल गर्मी के सीजन में पूर्वांचल सहित यूपी के अलग-अलग हिस्सों से जाने वालों में किसी न किसी के साथ हादसा होने की खबर आती है। जानकारों का कहना है कि नेपाल जाने के दौरान अनजान जगह पर सतर्कता बेहद जरूरी है, जिससे हादसे के शिकार होने से बच सके। नेपाल या फिर पहाड़ी इलाके के अन्य पर्यटन स्थालों पर जाने के बाद स्थानीय लोगों से जरूर बात करें और फिर नहाने या फिर पहाड़ी पर चढ़ने का काम करें, इससे यात्रा सुरक्षित और पर्यटन का आनंद ले सकेंगे। नेपाल से जुड़े लोगों के मुताबिक भारतीय क्षेत्र के विभिन्न प्रदेशों खास तौर पर यूपी के पूर्वांचल के सीमावर्ती क्षेत्रों से लोगों की झरने-झील में गिरने और हादसों में जान चली जाती है। एक अनुमान के अनुसार 100 से अधिक लोगों की जान मार्च से सितंबर के बीच जा चुकी है।
-
अनजान जगह, भाषा की समझ भी मुसीबत
जिले की 68 किलोमीटर सीमावर्ती इलाके नेपाल बाॅर्डर से लगते हैं। मधेश इलाके के करीब 30-35 किलोमीटर के दायरे में समतल एरिया है। इसके बाद से पहाड़ी इलाके शुरू हो जाते हैं। इसमें बुटल, अर्घाखांची, दांग, प्यूठान जनपद के अलावा आगे काठमांडो और पोखरा में पहाड़, वन झील और अनगिनत झरने हैं। गर्मी शुरू होने के साथ ही लोग नेपाल की ओर रुख करना शुरू कर देते हैं। इसमें युवाओं की संख्या अच्छी खासी है। जो गर्मी बढ़ने और छुट्टी होने के बाद नेपाल पहुंचते हैं। सुंदर दृष्य के साथ ही होटल और ढाबे अच्छे हैं। इसके साथ ही देव स्थान भी हैं। लेकिन, वहां जाने के बाद अनजान जगहों पर स्नान और सेल्फी का चक्कर शुरू हो जाता है। स्थल से अनजान होने के साथ ही पानी और पहाड़ी इलाके हादसे की वजह बन जाती है। हर साल पूर्वांचल के युवाओं के डूबकर या पहाड़ी से गिरकर मौत की खबर आती है। प्रशासन के जांच में सामने आता है कि लोकल लोगों के कहने के बाद नहीं माने और उतर गए।
-
सेल्फी खींच रही पहाड़ी की ओर
हर हाथ में स्मार्टफोन होने के साथ ही सोशल मीडिया के प्रति लोगों का झुकाव बढ़ता जा रहा है। घर पर रहने वाली महिलाओं के साथ हर उम्र के लोगों पर सोशल मीडिया का खुमार हावी है। ज्यादा से ज्यादा लाइक और व्यूज बटोरने के चक्कर में जोखिम भरे फोटो और वीडियो शूट करके अपलोड करने से लोग बाज नहीं आ रहे हैं। यह आकर्षण भी लोगों को पहाड़ की ओर खींच रहा है। इसमें युवाओं की तादाद अधिक है। घर से नेपाल में देव स्थान पर जाने की बात कर निकले युवा, कहीं पानी-झरने में नहाते समय फोटो वीडियो बनाते हैं। कहीं, पहाड़ी से गिर जाते हैं तो कहीं डूब जाते हैं। जैसा की हाल के कुछ साल और माह में हुआ जो इस बात की तस्दीक कर रहा है कि अनजान जगह कितना खतरनाक है।
-
केस - 1
नदी में डूबकर चली गई थी जान
23 मार्च 2026 को नेपाल के बुटवल इलाके में पढ़ने वाली नदी में संतकबीनगर जनपद के कुछ युवा गए थे। यहां तिनाऊ नदी में नहाते समय मेंहदावल निवासी अमन अंसारी, बखिरा निवासी फरहान अंसारी डूब गए थे। साथ गए अन्य साथियों ने घटना के बारे में जानकारी दी। इसके बाद जांच की गई। काफी तलाश के बाद दोनों शव मिल पाया था।
-
केस - 2
डूबकर हुई थी युवक की मौत
मार्च 2025 में गोरखपुर जनपद से तीन युवक नेपाल घूमने के लिए गए थे। यहां काली गंडक नदी में नहाने के लिए कूद पड़ा। दो युवक दो बाहर खड़े थे। नहाने के लिए कूदा युवक देखते नदी में समा गए और दूसरे दिन करीब एक किलोमीटर दूरी पर उसकी लाश मिली थी। वर्ष 2024 में कानपुर जनपद के दो युवक बुटवल के तिनाऊ नदी में नहाते समय डूब गए थे और उनकी मौत हो गई थी।