तीसरी लहर सिर पर, 42 लैब टेक्निशियन को निकालने की तैयारी
बजट के अभाव में हटाए जा रहे डूडा से लिए गए लैब टेक्निशियन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कोरोना की तीसरी लहर के संभावित खतरे के बीच आउटसोर्सिंग के 42 लैब टेक्निशियन को हटाने की तैयारी शुरू हो गई है। इन कर्मियों के लिए शासन से मिलने वाला बजट रोक दिया गया है। 30 जून के बाद से इन्हें कोई भुगतान नहीं करने का पत्र भी संबंधित आपूर्ति कंपनी को दिया जा चुका है। यानी वेतन नहीं मिलेगा तो काम करना इनके लिए मुश्किल होगा। इन स्थितियों से स्वास्थ्य महकमा परेशान है, मगर उसके हाथ में कुछ भी नहीं है।
गत वर्ष जब कोरोना का कहर लोगों पर मौत बनकर टूटा था, उस समय स्वास्थ्य महकमे को जांच का दायरा बढ़ाना पड़ा था। इसके लिए डूडा से लैब टेक्निशियन की मांग की गई। डूडा ने संबंधित कंपनी से इनकी मांग पूरी करा दी। इसके बाद इन्हें दो माह के लिए रखा गया, मगर स्थिति ठीक होने के बजाय बिगड़ने लगी तो इनकी समय सीमा बढ़ा दी गई। इनके लिए अलग से स्वास्थ्य विभाग को बजट उपलब्ध कराया गया। अब जब स्थिति नियंत्रित हो गई है तो इन ठेका कर्मियों को हटाने की कवायद शुरू हो गई है। इसमें से आठ जिला मुख्यालय पर शेष 34 कर्मी सीएचसी पर कार्य कर रहे हैं। आउटसोर्सिंग के आशीष, विष्णु, विपिन, संदीप और विवेक आदि कहते हैं कि आपदा काल में उस समय कोई नमूना के लिए तैयार नहीं था, तब खुद को खतरे में डालकर आपदा में सरकार के कंधे से कंधा मिलाकर चला। अब जब जरूरत नहीं है तो निकाला जा रहा है। जबकि तीसरी लहर आने की बात सरकार भी स्वीकार कर रही है। करीब एक वर्ष तक कार्य करने के बाद हटाए जाने से सभी बेरोजगार हो जाएंगे। कर्मचारियों के आपूर्ति कंपनी के प्रबंधक अरुण त्रिपाठी कहते हैं कि उन्हें पत्र मिल गया है कि अब इन कर्मियों के लिए कोई बजट नहीं है। ऐसे में उन्हें हटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। कहा कि यह लोग डीएम से भी मिलकर अपनी बात कह चुके हैं, मगर बजट के बिना वेतन कहां से दिया जाएगा।
बोले सीएमओ
सीएमओ डॉ. अनूप कुमार ने कहा आउटसोर्सिंग लैब टेक्निशियन कर्मियों के लिए शासन ने बजट बंद कर दिया है। ऐसे में उनको वेतन देना संभव नहीं हो सकेगा। इसलिए इन्हें हटाने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।