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बढ़ती ठंड में बढ़ी चोरों की चुनौती,पुलिस चौकन्ना

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ठंड में बढ़ी चोरों की चुनौती, पुलिस चौकन्ना
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दिसंबर व जनवरी का महीना चोरों के लिए अनुकूल
पिछले तीन वर्षों में इन्हीं महीनों में सबसे ज्यादा वारदात
गश्त-पिकेट बढ़ाकर पुलिस वारदात रोकने का कर रही दावा
बस्ती। ठंड के साथ चोरियां बढ़ रहीं हैं। आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हैं। दिसंबर-जनवरी की ठंड का मौसम चोरों के लिए हमेशा से अनुकूल रहा है। पिछले तीन वर्षों में देख गया कि 15 दिसंबर से 15 फरवरी के बीच जितनी चोरी की घटनाएं हुईं, उतनी पूरे साल में नहीं हुईं। दिसंबर में अब तक चार वारदात हो चुकी हैं। दूसरी ओर पुलिस गश्त और पिकेट के सहारे चोरियों को रोकने के उपाय ढूंढ रही है।
पूर्व की कुछ वारदातों के पर्दाफाश से यह बात सामने आई कि घुमंतुओं के अलावा जिले अथवा पड़ोसी जिले के बदमाश भी चोरी-लूट की घटनाओं को अंजाम देने लगे हैं। आईजी राजेश मोदक का कहना है कि सभी थानाध्यक्षों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। गश्त बढ़ाने को कहा गया है। शहर के बाहरी इलाकों की नई कॉलोनियों में विशेष चौकसी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
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एक दिसंबर को सिद्धार्थनगर के डुमरियागंज में तैनात सहायक चकबंदी अधिकारी सीताराम के कोतवाली क्षेत्र के अशोक नगर मड़वानगर कॉलोनी स्थित मकान में गेट का ताला तोड़कर चोरों ने लाइसेंसी रिवाल्वर (32 बोर), सात कारतूस के अलावा पांच हजार नकद, चांदी की तस्तरी, कटोरा, पायल, बिछिया व सोने की अंगूठी चुरा लिया था। 25 नवंबर से एक दिसंबर के बीच पुलिस लाइंस स्थित हेड कांस्टेबल के बैरक का ताला तोड़कर चोरों ने अलमारी व बक्से में रखे करीब ढाई से तीन लाख रुपये के जेवरात और छुट्टी पर गईं महिला आरक्षी के कमरे का ताला तोड़कर पायल, पांच हजार नकद व अन्य सामान चोरी कर ली थी।
एसपी आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि वारदतों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस टीमों का गठन किया गया है, जो आसपास के जिलों से आने वाले जमानत पर रिहा अपराधियों पर निगरानी रखने का कार्य करेंगे। वहीं शहर और देहात के बॉर्डर पर बने एटीएम की लिस्ट बनाई जा रही है, जिसमें पुलिस को रात में तीन से चार बार गश्त करने के निर्देश दिए हैं। खाली और सूने घरों पर भी निगरानी रखने का कार्य किया जाएगा।
ऐसे देते हैं वारदात को अंजाम
बावरिया व कच्छा बनियान जैसे गिरोह के बदमाश दीवाली से ही वारदात को अंजाम देना शुरू करते हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, चोरों गिरोह के बदमाश पहले शहर के बाहरी इलाकों में डेरा डालते हैं। महिलाएं खिलौने, कागज के फूल आदि बेचने के बहाने टोलियों में अलग-अलग इलाकों में जाकर रेकी करती हैं। लक्ष्य चिह्नित करने के बाद वारदात से पूर्व सरिया और अपने विशेष नुकीले औजारों की पूजा करते हैं। रात के दो बजे के आसपास महिलाओं के साथ गिरोह के पुरुष निकलते हैं। चिह्नित मकान के पास से पेड़ की हरी डाल तोड़ते हैं। एक जिले में एक घटना को अंजाम देकर दूसरे जिलों में चले जाते हैं। बावरिया गिरोह के गुर्गे यदि किसी मकान को निशाना बनाते हैं तो वहां बिना खून बहाए वापस नहीं आते। खून गिराना ये अपने लिए शुभ मानते हैं।
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ये बरतें सावधानियां
फेरी वालों को सामान खरीदते समय घर के अंदर न आने दें, भीख मांगने वाली महिलाओं व बच्चों से सतर्क रहें। पड़ोसियों और रिश्तेदारों के मोबाइल फोन नंबर अपने पास रखें ताकि जरूरत पर काम आ सके। आवाज होने पर हड़बड़ी में दरवाजा न खोलें। संदेह होने पर घर के अंदर व बाहर की लाइट जला दें। तत्काल पड़ोसी, रिश्तेदार व पुलिस को सूचना दें।
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