बस्ती। साइबर अपराधियों ने अब एआई वॉइस क्लोनिंग को नया हथियार बना लिया है। सिर्फ 10 सेकेंड की आवाज से हूबहू नकली आवाज तैयार कर परिवार या परिचित के नाम पर इमरजेंसी कॉल कर पैसे ऐंठे जा रहे हैं। मोबाइल नंबर, फर्जी यूपीआई और सोशल मीडिया से जुटाई जानकारी का इस्तेमाल कर ठग पैनिक क्रिएट करते हैं, जिससे लोग तत्काल ट्रांजेक्शन कर देते हैं। अभी हाल में ही ऐसा मामला सामने आ चुका है।
लालगंज थाना क्षेत्र के रमपुरवा बानपुर निवासी बेचूराम का कहना है कि उनके बेटे को विदेश में काम करते समय साइबर ठगों ने फोन पर फंसाकर 60 हजार रुपये ऐंठ लिया। बताया कि शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे उनके पास एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वालों ने दावा किया कि उनका बेटा उसके कब्जे में है और अगर उसे बचाना है तो तुरंत 60 हजार रुपये उनके बताए गूगल नंबर पर भेजने होंगे। उस समय किसी के रोने की आवाज आ रही थी, जो उसके बेटे के जैसी थी।
घबराहट में बेचूराम ने बाहर रहने वाले अपने रिश्तेदार की मदद से दो किस्तों में 15 हजार और 45 हजार रुपये साइबर ठगों के बताए नंबर पर भेज दिए। इसके बाद जब उन्होंने अपने बेटे से बात की, तो उन्हें पता चला कि उनके साथ ठगी हुई है और उनका बेटा सुरक्षित था। सीओ सत्येंद्र भूषण त्रिपाठी ने बताया कि लालगंज थाने में आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर छानबीन की जा रही है।
इस तरह के कई केस : एक वर्ष पहले सोनहा थानाक्षेत्र सिहारी सरदहा निवासी रतिकेश वर्मा ऐसी ठगी का शिकार हो चुके हैं। वहीं, इससे पहले नगर कस्बे के एक युवक को भी ऐसे ही फोन कॉल आई थी। छह नवंबर की शाम 6:53 बजे सोनहा क्षेत्र के सिहारी सरदहा गांव के रतिकेश शर्मा के मोबाइल फोन पर अनजान नंबर से कॉल आई। सामने व्यक्ति ने खुद रतिकेश का जीजा बताया। कहा कि मां की तबीयत खराब है। तत्काल रुपयों की जरूरत है। 20 हजार रुपये भेज दीजिए, वापस लौटा दूंगा। हूबहू आवाज आने पर विश्वास करके रतिकेश ने 20 हजार रुपये भेज दिया। रुपये फोन करने वाले के खाते में जाने के बाद उसका मोबाइल नंबर बंद हो गया। इसके बाद रतिकेश को समझ में आया कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। पुलिस केस दर्ज कर छानबीन कर रही है।
वीडियो कॉल स्कैम में भी फंसा रहे : आईटी के विशेषज्ञ रामबाबू श्रीवास्तव बताते हैं कि एआई वॉयस स्कैम की तरह ही वीडियो कॉल स्कैम भी खूब हो रहे हैं। इसमें अपराधी डीपफेक और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल कर लोगों को उनका परिचित बनकर वीडियो कॉल करते हैं और किसी न किसी बहाने रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते हैं। कई बार डीपफेक से अश्लील तस्वीरें या वीडियो बनाकर लोगों को ब्लैकमेल भी किया जाता है। पिछले तीन महीने के भीतर कोतवाली सहित कई थानों में केस दर्ज हुए हैं।