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Basti News: टंकी बनी, टोंटियां लगीं...प्यास अभी भी बाकी

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सदर ब्लॉक के ढोरिका गांव में शोपीस बनकर रह गया पानी टंकी संवाद
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बस्ती। जिले में जल जीवन मिशन के तहत सदर ब्लाॅक के 260 राजस्व गांवों बनी पानी की अधिकांश टंकियों में अब तक दो बूंद पानी नहीं उतर सका।
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ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए टंकियां बनाने की शुरुआत हुई थी तो लगा कि पेयजल संकट से जूझना नहीं पड़ेगा। इसके बाद पाइपलाइन बिछाई गई और घरों में टोंटियां भी लगाई गईं। लेकिन आज तक ग्रामीणों की प्यास नहीं बुझ सकी। हालांकि कुछ गांवों में आपूर्ति शुरू कराई गई मगर लो प्रेशर समस्या बन गई। जहां पानी पहुंचा वहां शुद्धता की भी कोई गारंटी नहीं।
जलजीवन मिशन की परियोजनाएं क्रियाशील न होने से आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है। अधिकांश गांव की आबादी को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। ग्रामीणों की शुद्ध पेयजल की उम्मीद टूटती नजर आ रही है तो वहीं, शोपीस बनी पेयजल टंकियां विभाग की शोभा बढ़ा रही हैं। जल जीवन मिशन के तहत संचालित हर घर नल योजना से ग्रामीणों को पाइपलाइन के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2019 में शुरुआत हुई।
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वर्ष 2024 तक लक्ष्य पूरा करने का निर्देश दिया गया था। खराब प्रगति के चलते शासन ने 2028 तक लक्ष्य पूरा करने का निर्देश दिया है। वहीं, कई जगहों पर टंकियां बनाने के बाद विभाग पाइपलाइन ही बिछाना भूल गया है। सरकार का हर घर नल, हर घर जल का सपना धरातल पर नहीं नजर नहीं आ रहा है। टोंटियां सूखी पड़ी हैं, निर्माण कार्य भी जगह-जगह अधूरा है। बाहर लगे बोर्ड पर कार्य पूर्ण देखकर ग्रामीण भी हैरत में हैं।
गुणवत्ता और लेटलतीफी देखकर लोगों का जल जीवन मिशन की टोंटियों से पेयजल मिलने की आस टूट चुकी है। अधिकांश जगहों पर टेस्टिंग में ही पाइपों का पक्का जोड़ कमजोर निकला। लोगों के घरों तक टोंटी के जरिये पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। पंप हाउस निर्माण से लेकर पाइप बिछाने व टोंटी लगाने का कार्य जिले में जिस कंपनी को मिला है, उसकी ढिलाई से तय समय में योजना से लोग आच्छादित नहीं हो पा रहे हैं। जहां, काम पूरा दिखाया गया है, वहां अभी काम ही चल रहा है।
अधिकांश गांवाें में शोभा बढ़ा रहीं टांकियां : सदर ब्लाॅक में 260 राजस्व गांव हैं, करीब 50 राजस्व गांव शहर से सटे हुए हैं। यहां 61 गांवों में पुरानी पेयजल परियोजना स्थापित है। इसमें से अधिकांश केवल दिखावा हैं। 25 जगहों पर जल जीवन मिशन के तहत निर्माण हुआ है। यह भी निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी पूरी नहीं हो पाई है। सुकरौल ग्राम पंचायत में जीवन मिशन का कार्य अधूरा पड़ा है। डेढ़ करोड़ रुपये की यह परियोजना बाहर लगे बोर्ड पर मार्च 2024 में ही पूर्ण दिखा दी गई है, जबकि यहां अभी पानी के टंकी का पिलर खड़ा हो रहा है।
सोलर कनेक्शन आदि कार्य भी अधूरा है। निर्धारित अवधि के करीब दो वर्ष बाद भी परियोजनाएं पूरी नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि टेस्टिंग के समय पाइपों के जोड़ कई जगह खुल गए थे और सड़क पर पानी बहने लगा था। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना के तहत हर्दिया में वर्ष 2015-16 में पानी की टंकी बनी थी। दो करोड़ 41 लाख की इस परियोजना में ढिढौहां सहित सात गांव शामिल थे।
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आपूर्ति देने की बात तो दूर एक दशक में ही यह धराशायी हो गई। यहां जल जीवन मिशन के तहत तीन करोड़ 14 लाख रुपये से निर्माण का बोर्ड लगा है। कार्य को पूरा भी दिखा दिया गया है, लेकिन वर्तमान समय में यहां कोई निर्माण नहीं हुआ है। पाइपें सड़क के बगल फेंकी पड़ी हैं। घरों पर लगी टोंटियां महज दिखावा साबित हो रही हैं। ढोरिका में भी कार्य अधूरा है। लोगों के घर लगी टोंटियों से पानी नहीं गिर रहा है। जगह-जगह पेयजल पाइपें फेंकी पड़ी हैं। सोलर कनेक्शन भी नहीं हुआ है।
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