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Basti News: पीएम ने सराहा पर मनोरमा नहीं हो पा रही मनोरम

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हर्रैया कस्बे के पास मैली हुई मनोरमा। संवाद
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बस्ती। त्रेताकाल की अविरल मनोरमा का प्रवाह कलयुग की 21वीं सदी में थम गया है। जिस मनोरमा नदी की प्रधानमंत्री मोदी ने तारीफ की थी वह मनोरम नहीं हो पा रही है। शैवाल, सिल्ट, गंदगी, कचरा से नदी भरी पड़ी है। इधर सात-आठ सालों में कुछ सजग प्रहरियों ने कई बार इस नदी के संरक्षण की मुहिम छेड़ी लेकिन, हर बार यह राजनीतिक खींचतान की शिकार बन गई। नतीजा न सिल्ट की सफाई हो पा रही है और न ही नदी के आभामंडल शुद्ध हो पा रही है।
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बता दें कि तीन महीने पहले मनोरमा की सफाई की सुगबुगाहट थोड़ी तेज हुई तो यह मुद्दा सियासत की भेंट चढ़ गया। अब सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा आम हो गई है कि हर्रैया में इस नदी की वैतरणी पर सवार होकर वर्ष 2027 में विधानसभा की राह आसान करने की कोशिश में कई राजनीतिक धुरंधर लग गए हैं। सत्तासीन दल के ही दो मनोरमा के जीर्णोद्धार का अलग-अलग तौर तरीका लेकर आमने-सामने हो गए हैं। भाजपा नेता चंद्रमणि पांडेय सुदामा मनोरमा की सफाई में अब और इंतजार करने को राजी नहीं हैं।
वह लगातार जिला प्रशासन से सिंचाई विभाग, मनरेगा, पंचायत विभाग के समन्वय से सिल्ट सफाई कराए जाने की मांग रहे हैं। इसको लेकर अप्रैल में उन्होंने डीएम कार्यालय के सामने भूख हड़ताल भी की थी। इसके बाद जब बात नहीं बनी तो अपने समर्थकों के साथ सप्ताह भर तक पंडूल घाट से लेकर बाबा झुंगीनाथ मनोरमा नदी में सफाई अभियान चलाया। बावजूद इसके नदी के सफाई मुहिम को रंग नहीं मिल सका।
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उधर, हर्रैया से भाजपा विधायक अजय सिंह ने इसी बीच दावा किया कि मनोरमा के जीर्णोद्धार के लिए उन्होंने शासन स्तर से बजट लाने का प्रयास तेज किया है। उन्होंने साफ किया कि बगैर संसाधन और बजट के मनोरमा को स्वच्छ स्वरूप नहीं दिया जा सकता है। सियासतदारों की इस विरोधाभासी योजना से मनोरमा नदी विवादों में फंस गई है। चर्चा है कि इसी वजह से प्रशासन ने भी मनोरमा के मुद्दे से खुद को अलग-थलग कर लिया है।
मनोरमा की भौगोलिक स्थिति : मनोरमा नदी का उद्गम स्थल गोंडा जिले के इटियाथोक स्थित तिर्रे ताल है। यह नदी बस्ती जिले में परशुरामपुर ब्लॉक के मखौड़ा धाम से होते हुए कुदरहा ब्लॉक के लालगंज कस्बे के पास कुआनो-मनवर संगम के रूप यह स्थल चर्चित है। नदी की कुल लंबाई 174 किमी है। जबकि जिले में लंबाई 115 किमी है।
नदी में हो रहा फैक्टरियों के कचरे का प्रवाह : मनोरमा नदी में गोंडा जिले की आधा दर्जन फैक्टरियों का कचरायुक्त पानी प्रवाहित किया जा रहा है। परशुरामपुर, हर्रैया आदि कस्बों का गंदा पानी नदी में प्रवाहित हो रहा है। कूड़ा-कचरा भी नदी के किनारे डंप किया जा रहा है।
यह हैं पौराणिक मान्यता : पौराणिक मान्यता है कि त्रेताकाल में चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ ने मनोरमा नदी के तट पर स्थित मख धाम (वर्तमान में बस्ती जिले का मखौड़ा धाम) में पुत्र कामेष्टि यज्ञ किया था। अयोध्या के 84 कोसी परिक्रमा का शुभारंभ और समापन इसी नदी के तट पर स्थित मखौड़ा धाम में ही होता है।
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