रोडवेज परिसर के अस्थायी रैन बसेरा में खड़े यात्री।
बस्ती। हाड़ कंपाती ठंड में यदि रात रैन बसेरे में गुजारनी है तो साथ में ओढ़ने के लिए कंबल लेकर जाएं। क्योंकि वहां उपलब्ध रजाई और गद्दे बेदम हैं। रात में ये सोने नहीं देंगे। पूरी रात करवट बदलनी पड़ेगी और कंपकपी भी छूटेगी। शनिवार की दोपहर करीब एक बजे रोडवेज परिसर में बनाए गए अस्थायी रैन बसेरे के सभी बिस्तर खाली मिले। गद्दे पर न तो चादर बिछी थी और न ही रजाई पर लिहाफ चढ़े थे। देखने में वह काफी गंदे दिख रहे थे। इसके अलावा शहर में दो स्थायी रैन बसेरा है। एक डूडा कार्यालय के पास तो दूसरा दीवानी चौराहे के पास। यहां जरूर हालात कुछ बेहतर दिखे।
ठंड में शहर में पर्याप्त अलाव की व्यवस्था भी नहीं है। कुछ लोग चंदा जुटाकर ठंड से बचने के लिए अपने मोहल्ले में अलाव की व्यवस्था कर रखे हैं। इसके बावजूद नगर पालिका प्रशासन दावा कर रहा है कि 22 स्थानों पर अलाव जलाए जा रहे हैं।
बृहस्पतिवार को हल्की धूप खिलने के बाद शुक्रवार और शनिवार को सूर्य देव के दर्शन नहीं हुए। सुबह-शाम को भीषण कोहरे के साथ ही दिनभर धुंध छाई रहती है। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी की बर्फीली हवा छनकर पूर्वांचल की तरफ आ रही है। इससे यहां का मौसम काफी ठंडा हो गया है। इसका असर बाजारों पर भी पड़ रहा है। इन दिनों खरमास चल रहा है। ऊपर से कड़ाके की ठंड से लोग खरीदारी करने नहीं निकल रहे हैं। इससे दुकानदारों की दुकानदारी ठप है।
रेलवे और बस स्टेशन पर दिखी कम भीड़ : रेलवे और बस स्टेशन पर शनिवार को काफी कम यात्री दिखे। रोडवेज की करीब 10 बसें परिसर में खड़ी थीं। हर बस में चार-पांच यात्री बैठे दिखे। परिसर में अलाव की व्यवस्था जरूर थी। कुछ यात्री अलाव के पास बैठकर ठंड भगाते दिखे। ट्रेनों की लेटलतीफी की वजह से रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ कम देखने को मिली। स्टेशन की प्रतीक्षा कर रहे अमन शर्मा ने कहा कि उन्हें बिहार जाना था, 11 बजे उनकी ट्रेन थी। लेकिन दोपहर एक बजे तक ट्रेन नहीं आई है।