संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले में खुदकुशी के आंकड़े विचलित करने वाले हैं। शायद ही ऐसा कोई दिन गुजरता हो, जिस दिन फंदे से लटकने की घटना सामने न आती हो।
हैरान करने वाली बात यह है कि 15 से 25 वर्ष आयु वर्ग के लोग ऐसा कदम उठाने में तनिक भी संकोच नहीं कर रहे है। ऐसे मामलों की तह में जाने पर किसी ने घरेलू कलह में अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली तो कोई कॅरिअर को बिगड़ते देख खुदकुशी जैसा कायराना कदम उठा ले रहा है।
प्रेम प्रसंग में पड़कर इहलीला समाप्त करने वालों की फेहरिस्त भी छोटी नहीं है। ऐसा मंजर देखकर अभिभावक भी सहमे हुए हैं।
हाल में ही सरस्वती विद्या मंदिर राम बाग के 12वीं के छात्र का प्राइवेट हॉस्टल में फंदे से लटका शव मिला था। उसके दोस्तों ने बताया कि बोर्ड परीक्षा में उसका पेपर खराब हो गया था। 15 दिसंबर 24 को रुधौली थाना क्षेत्र के एक गांव की छात्रा की खुदकुशी का मामला सामने आया था। इस मामले में एक सुसाइड नोट मिलना था। उससे पता चला कि एक दुकानदार उसे ब्लैकमेल करता था। सोनहा थाना क्षेत्र के एक गांव की लड़की ने मोबाइल के लिए डांटने पर खुदकुशी कर ली थी।
पुलिस उप महानिरीक्षक दिनेश कुमार पी. का कहना है कि कमजोर आत्मबल और अपने पैर पर खड़े होने की घटती क्षमता के कारण इस तरह की घटनाओं में तेजी आई है। इसे रोकने के लिए युवाओं को सकारात्मक कार्य से जुड़े रहना चाहिए। मनोविज्ञानी डॉ. शिव प्रसाद का कहना है कि व्यक्ति आवेश के ऐसे क्षणों से गुजरता है, जिसमें आत्मघाती मन: स्थिति बन जाती है। व्यक्ति सही और गलत में फर्क नहीं कर पाता। उसे समझ में नहीं आता है कि वह क्या कर रहा है। कई बार उपेक्षा, कुंठा की वजह से असामान्य हो जाता है।
कई बार अपनी जिद, इच्छित वस्तु के हासिल न होने की झुंझलाहट और आत्मग्लानि में मौत को गले लगाने की ठान लेता है। ऐसे में परिवार के किसी व्यक्ति में कुछ असामान्य दिखे तो उसे नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। ज्यादा अच्छा होगा कि वह मनोचिकित्सक से तत्काल संपर्क करे। समाजशास्त्री डाक्टर रघुवर पांडेय बताते हैं कि आजकल योग्यता से ज्यादा पाने की उम्मीद करने की वजह से भी युवाओं में तनाव बढ़ रहा है। इसके कारण परिवार में भी कलह पैदा हो रहा है।
कई लोग कर्ज में दबकर, प्रेम प्रसंग में निराशा आदि कारण भी इसके पीछे अहम हैं। इसके लिए परिवार का माहौल और व्यक्ति की संगति सबसे ज्यादा जिम्मेदार है।