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Basti News: भूमाफिया का संजाल थाना और तहसील तक...छुट्टी के दिन करते हैं अवैध कब्जा

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अक्सर अवकाश के दिन विवादित जमीनों पर हो रहा कब्जा, दौड़भाग करने पर भी नहीं रुक पाता है निर्माण
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। भू-माफिया ऐसे ही नहीं सक्रिय हैं, इनका संजाल थानों से लेकर तहसील तक फैला हुआ है। पहले निचले स्तर के जिम्मेदारों से सेटिंग करते हैं। जब सबकुछ भूमाफिया के अनुकूल हो जाता है तो छुट्टी के दिन अवैध कब्जे को अंजाम दे दिया जाता है। इस दौरान शिकायतकर्ता इधर से उधर दौड़ते रहते हैं, लेकिन सुनवाई कहीं नहीं हो पाती। पुलिस मौन रहती हैं। राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मिलते ही नहीं है। लिहाजा निर्माण रुक नहीं पाता है।
जमीन हथियाने में तू डाल-डाल, मैं पात-पात का खेल भूमाफिया लगातार खेल रहे हैं। वह पहले विवादित जमीन चिह्नित करते हैं। फिर इस पर कब्जा को लेकर दाव चलना शुरू कर देते हैं। इनका हथियार कोई और नहीं राजस्व और पुलिस विभाग के जिम्मेदार ही बनते हैं। चढ़ावा चढ़ाकर पहले राजस्व कर्मियों और स्थानीय पुलिस के करीब हो जा रहे हैं। फिर यहीं से जमीन हथियाने का चक्रव्यूह रचा जा रहा है। न्याय की अंतिम कड़ी थाने की पुलिस और राजस्व विभाग के निरीक्षक एवं लेखपाल ही होते हैं।
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भूमाफिया के खिलाफ शीर्ष अधिकारियों के यहां होने वाली शिकायत भी घूम-फिरकर इसी कड़ी के पास पहुंचती है। यहां से गोलमाल रिपोर्ट लगाकर माहौल भूमाफिया के पक्ष में तैयार कर दिया जा रहा है। जब सबकुछ अनुकूल हो जाता है तो अंतिम दाव विवादित जमीन पर कब्जे का चला जा रहा है। इसके लिए तहसील स्तरीय मजिस्ट्रेट को निर्माण के लिए प्रार्थनापत्र सौंपा जा रहा है। जिस पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने जैसा आदेश अंकित होकर प्रार्थनापत्र राजस्व निरीक्षक और स्थानीय पुलिस के पास पहुंच जा रहा है।
इसी को हथियार बनाकर भूमाफिया अवकाश के दिन विवादित जमीन पर कब्जा करना शुरू कर देते हैं। मौके पर तनाव पूर्ण स्थिति होने पर पुलिस इनकी मदद में आ जाती है। विरोध करने वालों से तत्काल निर्माण रुकवाने संबंधी आदेश मांगे जाते हैं। इस पर शिकायतकर्ता निरूत्तर हो जा रहे हैं। वह सक्षम अधिकारियों तक पहुंचने के लिए दौड़भाग शुरू कर देते हैं।मगर, छुट्टी होने के नाते कोई नहीं मिलता है। नतीजा तब तक जमीन पर निर्माण कर कब्जा पूरा हो जा रहा है।
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केस- एक
शहर से सटे जखनी गांव में मेडिकल कॉलेज रोड पर करोड़ों रुपये की जमीन सार्वजनिक उपयोग की श्रेणी में गड़ही के नाम से दर्ज है। भूमाफिया इसे एक दशक से कब्जा करते चले आ रहे हैं। पिछले साल हल्का लेखपाल ने कुछ लोगों पर केस भी दर्ज कराया था। अभी दो महीने पहले राजस्व टीम ने मौके पर पहुंचकर पैमाइश भी की। अवैध कब्जा सामने आया तो भूमाफिया को चेतावनी दी गई। कुछ दिन बाद मामला ठंडा हुआ तो भूमाफिया फिर मामला अपने अनुकूल कर लिया। इस जमीन पर फिर कब्जा शुरू हो गया है। अवकाश के दिन यहां मिट्टी पटाई का कार्य किया जा रहा है। जिम्मेदार कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
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केस- दो
सदर तहसील के कलवारी थाना क्षेत्र के सिगही गांव का मामला है। यहां के संदीप कुमार का कहना है कि उनकी पैतृक जमीन के बंटवारे का मुकदमा एसडीएम न्यायालय में विचाराधीन है। 15 अक्तूबर रविवार को संबंधित विवादित जमीन पर कुछ लोग अचानक निर्माण शुरू कर दिए। संदीप दौड़कर थाने पहुंचे। मगर, यहां पुलिस ने निर्माण रोकने संबंधी आदेश मांग लिया। पूर्व की तिथि में हुए स्थगन आदेश को उन्होंने दिखाया भी, लेकिन पुलिस ने इसे नहीं माना। बाद में एसडीएम को फोन पर सूचना दी। यहां से भी कोई राहत नहीं मिली। उधर, विवादित जमीन पर निर्माण कर कब्जा कर लिया गया।
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केस- तीन
हर्रैया तहसील के परसुरामपुर थाना क्षेत्र के नंदनगर के रामजनम पाठक के अनुसार उनकी विवादित जमीन का मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। उनका परिवार बाहर रहता है। कुछ दिन पहले विपक्षियों ने अचानक अवकाश के दिन संबंधित जमीन पर निर्माण शुरू कर दिया। उन्हें पता चला तो तत्काल स्थानीय पुलिस और राजस्व कर्मियों से मदद की गुहार लगाई। मगर, सुनवाई न होने पर डीएम के व्हाट्सएप पर शिकायत की। इसके बाद हर्रैया एसडीएम हरकत में आए। मौके पर राजस्व एवं पुलिस की टीम पहुंची। तब जाकर निर्माण पर रोक लग सकी।
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केस चार
शहर के पुरानी बस्ती क्षेत्र की बेसकीमती जमीन पर अचानक कब्जा शुरू हो गया। भूमाफिया ने यहां निर्मित मंदिर को भी जेसीबी से ध्वस्त करा दिया। इस मामले को लेकर पीड़ित पक्ष की ओर से एक महिला ने आवाज उठाई। मीडिया और उच्चाधिकारियों के जरिये महिला ने मामले को तूल पकड़ाया तो स्थानीय जिम्मेदारों के होश फाख्ते हो गए। तत्काल निर्माण को रुकवाना पड़ा। इस मामले में 10 जून को तत्कालीन थानाध्यक्ष पुरानी बस्ती निलंबित भी हुए।
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हाईप्रोफाइल का मामला होने पर रुकता है निर्माण
विवादित जमीन पर अवैध कब्जे का मामला जब हाईप्रोफाइल का बन जाता है तभी स्थानीय स्तर के अधिकारी हरकत में आते हैं। पीड़ित पक्ष जमीन कब्जा किए जाने के मामले को लेकर जब डीएम, एसपी, कमिश्नर एवं शासन तक तत्काल शिकायत पहुंचा रहा है तभी स्थानीय जिम्मेदार निर्माण कार्य रुकवा रहे हैं। इसके अलावा कई मामलों में जनप्रतिनिधियों को भी हस्तक्षेप करना पड़ रहा है।
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यदि जमीन विवादित है तो निर्माण नहीं किया जा सकता है। दबंगई से यदि कोई विवादित भूमि पर निर्माण करेगा तो उसके विरुद्ध कार्रवाई होगी। जमीन से संबंधित मामलों को लेकर सभी अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कहीं लापरवाही सामने आएगी तो संबंधित लोग बख्शे नहीं जाएंगे।
-अंद्रा वामसी, डीएम
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