मोर्चरी में बंदी के शव को चूहे ने कुतरा
बस्ती। विचाराधीन बंदी के शव को मोर्चरी में जानवर द्वारा खाने और पैर में घाव छिपाने की घटना की मानवाधिकार आयोग से शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया है। तीन सदस्यीय टीम की जांच में नए तथ्य सामने आए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एनीमल बाइट की बात तो लिखी गई है, मगर जो तथ्य जांच में मिले हैं, उसमें चूहे अथवा छछूंदर के कुतरने से कान व चेहरे पर हल्के घाव होने की आशंका जताई गई है। टीम के अनुसार पैर में जो टेप लगने की बात शिकायतकर्ता की ओर से कही गई है, वास्तव में वह पस था, जो मृतक के पैर से निकल कर जम गया था और वीडियोग्राफी में वह टेप जैसा नजर आ रहा था। टीम ने शासन को रिपोर्ट भेज दी है।
संतकबीरनगर निवासी 70 वर्षीय विचाराधीन बंदी मो. वसीम कैंसर से पीड़ित था। चार नवंबर को उसकी तबीयत खराब होने पर जिला अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजनों ने आरोप लगाया कि दो दिनों तक शव को मोर्चरी में रखा गया था। उन्होंने शव की एड़ी के पास व कान हिस्से को जानवर द्वारा खाने का आरोप लगाया था। आरोप यह भी था कि पैर के पास टेप लगाकर घाव को छिपाया गया था। इसे लेकर मानवाधिकार आयोग ने जब जुर्माना लगाया तो स्वास्थ्य विभाग के होश उड़ गए।
तत्काल एसीएमओ डॉ. सीएल कन्नौजिया, वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. राम प्रकाश व डॉ. एसबी सिंह की तीन सदस्यीय टीम ने इसकी जांच की। जांच में मिले तथ्यों के आधार पर टीम ने यह लिखा कि शव पर जो निशान थे, उसे चूहे अथवा छछूंदर द्वारा कुतरने की आशंका है। टीम ने यह भी लिखा है कि दाएं पैर के पास कोई टेप नहीं, बल्कि उनके शरीर से निकला पस जम गया था, जो टेप जैसा प्रतीत होता है।
एसीएमओ डॉ. फखरेयार हुसैन ने बताया कि चूंकि यहां की मोर्चरी का फ्रिज खराब है और फाटक क्षतिग्रस्त हो गया है। ऐसे में मृतक के शव को जानवर ने नहीं, बल्कि चूहे अथवा छछूंदर के कुतरने की आशंका है। यह सही है कि मृतक के शव को सम्मान के साथ रखना चाहिए। इसे लेकर जांच में टिप्पणी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि वीडियोग्राफी में जिसे टेप समझा जा रहा है वास्तव में वह मृतक के शरीर से निकला पस था, जो जम गया था और वह टेप जैसा नजर आ रहा है। रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।