इस तरह की जालसाजी करने वाले भू-माफिया अमूमन खारिज-दाखिल भी तहसील की मिलीभगत से करवा लेते हैं। ऐसे में फर्जी बैनामे की पोल दो स्थितियों में खुलती है। एक तो जब जमीन का असली मालिक खतौनी निकालता है और उसमें उसी के नाम का बैनामा किया हुआ दिखता है तो उसे पता चलता है कि उसकी जमीन का बैनामा हो चुका है। अन्यथा खरीदने वाला जब जमीन पर कब्जा करने पहुंचता तो असली मालिक उस पर आपत्ति करता है तब जानकारी हो पाती है।
केस एक
दो जुलाई को फर्जी तरीके से जमीन बैनामा करा लेने के एक मामले में हर्रैया थाने की पुलिस ने सात आरोपियों पर केस दर्ज किया। हर्रैया थाना क्षेत्र के महाखरपुर निवासी राम सुरेश ने तहरीर में कहा है कि 27 जुलाई 2021 से दो नवंबर 2021 के बीच उप निबंधक कार्यालय हर्रैया में विपक्षियों ने उसकी जमीन हड़पने की नीयत से जालसाजी व धोखाधड़ी कर अवैध तरीके से बैनामा करा लिया। इस मामले में पुलिस साक्ष्यों के आधार पर केस दर्ज कर छानबीन कर रही है।
केस दो
पांच जून 2022 को कोतवाली क्षेत्र के मड़वानगर में स्टांप चोरी की जांच करने पहुंचे उप निबंधक कार्यालय के जांच अधिकारी को बड़े गोलमाल की जानकारी हुई। पता चला कि जमीन के असली मालिक के स्थान पर दूसरे व्यक्ति को खड़ा कर कूटरचित दस्तावेज के सहारे करीब 24 बिस्वा जमीन का बैनामा करा लिया गया। वह जमीन महज 10 लाख रुपये में बैनामा हुई थी। जमीन के असली मालिक को जानकारी हुुई तो वह प्रकरण की शिकायत लेकर एसपी के पास पहुंचे। कोतवाली में केस दर्ज है।