- फर्जी डीएल प्रकरण : धीमी पड़ गई डीएल बनाने की रफ्तार, बाबू से लेकर अधिकारी तक हुए चौकन्ने
- डीएम को सौंपी जाएगी रिपोर्ट, जांच टीम में एडीएम और एएसपी भी शामिल
बस्ती। बैकलाॅग फीडिंग के आधार पर फर्जी हैवी ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) निर्गत किए जाने के मामले में जांच अभी पूरी नहीं हुई है। जांच टीम में शासन से नामित उप परिवहन आयुक्त राजकुमार सिंह के अलावा बस्ती के एडीएम प्रशासन प्रतिपाल सिंह और एएसपी श्यामकांत भी शामिल हैं। यह टीम बैकलॉग के आधार पर पता बदलकर जारी किए गए हैवी डीएल का डाटा इकट्ठा करने के बाद दलालों के सिंडिकेट तक पहुंचने की फिराक में है। जांच के दौरान आउटसोर्सिंग के कर्मचारी, बाबू और कुछ अधिकारी भी सहमे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, इस तरह के फर्जी हैवी डीएल जारी किए जाने में इनकी भी भूमिका संदिग्ध पाई जा रही है।
जांच टीम हैवी डीएल का पटल देखने वाले आउटसोर्स कर्मचारी और अधिकारियों से भी गहन पूछताछ कर रही है। इसमें दलालों के माध्यम से डीएल बनाने की पुरानी परंपरा से भी जांच अधिकारी भलीभांति परिचित हो रहे हैं। अंदरखाने की खबर हैं कि जिस कर्मचारी की ओर से आरआई का लॉगिन और पॉसवर्ड इस्तेमाल करके अरुणाचल प्रदेश से बैकलॉग फीडिंग कराए गए हैवी डीएल के पता बदलने की स्वीकृति दी गई, उनसे संबंधित दलाल की जानकारी एकत्रित की जा रही है।
विभागीय जिम्मेदार इसलिए सहमे हुए हैं क्योंकि टीम जैसे ही दलालों तक पहुंचेगी पूरी पोल खुलने में देरी नहीं लगेगी। इसमें शामिल विभाग के संदिग्ध कर्मचारी और अधिकारी भी बेनकाब होंगे। टीम इस बिंदु पर काम करना शुरू कर दी है। टीम पता बदलकर डीएल निर्गत करने वाले जिम्मेदारों से दलालों का नाम उगलवाने में जुटी हुई है। इधर, जांच प्रक्रिया आगे बढ़ने से विभाग में हड़कंप की स्थिति है।
डीएल बनाने की रफ्तार धीमी पड़ गई है। रोजाना 35 से 40 एलएमवी डीएल की जगह अब 10 से 15 डीएल बनाए जा रहे हैं। वह भी पूरी जांच पड़ताल के बाद ही स्वीकृति दी जा रही है। वहीं, हैवी डीएल बनाने में जिम्मेदार फिलहाल हाथ खड़े कर दे रहे हैं। इसके अलावा, विभाग में फिटनेस, परमिट आदि पटलों पर भी तैनात बाबू और संबंधित अधिकारी सकते में हैं। अब जिम्मेदार फूंक-फूंक कर ही कदम उठा रहे हैं। हर फाइल की जांच-पड़ताल के बाद ही अधिकारी हस्ताक्षर कर रहे हैं।
शासन की टिकी है नजर
बस्ती में हैवी डीएल में हुए फर्जीवाड़े पर शासन की नजर टिकी हुई है। चर्चा हैं कि जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद बड़ी कार्रवाई हो सकती है। उम्मीद हैं कि जांच टीम अगले सप्ताह रिपोर्ट तैयार कर लेगी। यह रिपोर्ट डीएम कृत्तिका ज्योत्सना को सौंपी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर वह कार्रवाई की संस्तुति करते हुए इसे शासन को भेजेंगी। इसके बाद ही कार्रवाई की जा सकती है।
छुट्टी के दिन खुला रहा आरटीओ कार्यालय
शुक्रवार को सार्वजनिक अवकाश के दिन भी छबिलहा खोर स्थित आरटीओ कार्यालय खुला रहा। हालांकि, बाहरी लोगों का आना जाना नहीं रहा। लेकिन, विभागीय लोग कार्यालय में मौजूद रहे। इस दौरान एआरटीओ कार्यालय में अभिलेख कक्ष से लेकर बाबुओं और अधिकारियों के कमरों की सफाई कराई गई। पुरानी फाइलें भी दिन भी सुव्यवस्थित की गई। एआरटीओ माला वाजपेई ने बताया कि डीएम ने अभी हाल ही में सभी विभागों में सफाई, पेयजल, शौचालय आदि की व्यवस्था को दुरुस्त कराने के निर्देश दिए हैं। इसी के अनुपालन में कार्यालय की सफाई, पेयजल आदि की व्यवस्था सुदृढ़ की जा रही है।
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ऐसे बनता है डीएल
आरटीओ के अधीन डीटीआई सेंटर में संचालित संभागीय निरीक्षक प्राविधिक कार्यालय में दलालों के माध्यम से एलएमवी एवं हैवी डीएल की फाइल ऑनलाइन फीस जमा करने के बाद पहुंचती है। इसके बाद आरआई स्तर से नामित आउटसोर्स कर्मचारी संबंधित आवेदक का बॉयोमीट्रिक कराने के बाद ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करता है। इसके बाद डीएल बनकर आवेदक के घर डाक द्वारा पहुंचता है। सूत्रों के अनुसार, प्रत्येक दलाल फाइल पर कोड अंकित होता है। शाम को फाइल के हिसाब से प्रत्येक एलवी डीएल पर दो हजार और हैवी डीएल पर तीन हजार रुपये का हिसाब संबंधित आउटसोर्स कर्मचारी करता है। बाद में यह रकम जिम्मेदारों तक पहुंचती है।
फर्जी हैवी डीएल के मामले में जांच अभी चल रही है। जांच टीम रिपोर्ट तैयार करने के बाद डीएम को सौंपेगी। उनके स्तर से कार्रवाई की संस्तुति कर शासन को भेजी जाएगी। इसके बाद कार्रवाई हो सकती है। - फरीदुद्दीन, आरटीओ, प्रशासन।