बस्ती। बेहतर पोषण नहीं मिलने के कारण बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। कुपोषण की वास्तविक स्थिति जानने को अभियान चलाया गया। अभियान के तहत ऐसे कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया गया जो कुपोषण के कारण बौनेपन के शिकार हो गए हैं। जांच रिपोर्ट में 16 हजार बच्चे जहां गंभीर नाटे की श्रेणी में चिह्नित किए गए हैं, वहीं 22 हजार बच्चे मध्यम नाटे मिले हैं। अब प्रशासन ऐसे बच्चों को कुपोषण की श्रेणी से बाहर लाने का प्रयास कर रहा है।
विशेष अभियान के तहत जिले में सात मई से 25 मई तक चलाए गए अभियान में शून्य से पांच साल तक के बच्चों का मापक कार्य हुआ। जिसमें, 16016 बच्चे बौनेपन के शिकार मिले हैं। यानी इन बच्चों में वजन व लंबाई उम्र के अनुसार नहीं पाए गए। ऐसे बच्चों को अब कुपोषण की श्रेणी से बाहर लाने की कवायद की जाएगी। इसके अलावा 22600 बच्चे मध्यम बौनेपन के शिकार हैं। जांच रिपोर्ट के बाद, कई विभागों की नींद उड़ गई है।
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती, धात्री और बच्चों को कुपोषण से दूर करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। जहां पुष्टाहार से लेकर तमाम चीजों का वितरण भी किया जाता है, लेकिन इसके बाद भी केंद्रों पर बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पा रहा है। जानकारों का कहना है कि बच्चे के विकसित न होने की वजह उसे सही मात्रा में पोषण न मिलना है। एक स्वस्थ बच्चा पैदा होने तक ढाई से साढ़े तीन किलो तक वजनी होना चाहिए लेकिन जन्म के बाद एक माह बाद तक बच्चे का वजन तीन किलो है तो मां को पर्याप्त पोषण नहीं मिल रहा या फिर बच्चा बीमार है। छह माह के बाद भी बच्चे का वजन चार किलो से कम है तो वह उसका शरीर ठीक तरह से विकसित नहीं हो पाएगा।
अभियान में 4479 मिले अतिकुपोषित, 8369 कुपोषित : अभियान में 4479 अतिकुपोषित और 8369 कुपोषित में बच्चे चिह्नित किए गए हैं। अब जनपद में कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों को इस श्रेणी से बाहर निकाला जाएगा। इसके लिए विभाग फल, दूध और अन्य पोषण किट परिवार को देगा।
सीडीओ की सुपर-छह टीम कर रही निगरानी : कुपोषित बच्चों को इस श्रेणी से बाहर लाने के लिए प्रशासन लगातार प्रयास रहा है। सीडीओ सार्थक अग्रवाल ने इसके लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है।
अधिक कुपोषित वाले गांवों में अधिकारी ऐसे बच्चों की निगरानी कर रहे हैं। साथ ही इन परिवारों को प्राथमिकता के साथ सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है। टीम में छह से अधिक लोग शामिल हैं।