बस्ती। गर्मी बच्चों पर सितम ढा रही है। चिलचिलाती धूप के चलते बीमार पड़कर बच्चे अस्पताल पहुंच रहे हैं। यहां जांच होने पर बच्चों में डायरिया, बुखार समेत सांस की समस्या सामने आ रही है। इससे जिला अस्पताल का बाल रोग विभाग फुल हो गया है, तो बच्चों की संख्या बढ़ने से बेड के अलावा संसाधन भी कम पड़ जा रहे हैं। लिहाजा, एक बेड पर दो-दो बच्चों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
वहीं, इमरजेंसी में जो मरीज आ रहे उन्हें एक से दो घंटे में प्रारंभिक उपचार के बाद मेडिकल समेत अन्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया जा रहा है, जबकि पूर्व में पांच से छह घंटे के बाद ही मरीज को अलग वार्ड में भेजते थे। ऐसा मरीजों की बढ़ी संख्या के बाद निर्णय लिया गया है। बताया गया कि गर्मी बढ़ने के साथ ही ओपीडी में मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। सोमवार को 1162 मरीज उपचार के लिए पहुंचे। अधिकांश मरीज मेडिसिन विभाग और बाल रोग विभाग के ही रहे। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस पटेल ने बताया कि गर्मी के चलते बच्चों में दस्त व उल्टी की शिकायतें बढ़ी हैं। बुखार व सिरदर्द के भी केस आए। आठ बच्चों को चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती कराया गया, जिन्हें पेट में संक्रमण की शिकायत थी। चिल्ड्रेन वार्ड में 53 बच्चे हो गए हैं, जबकि बेड 24 ही है। फिजीशियन डॉ. एसडी ओझा के अनुसार, मेडिसिन विभाग में बुखार, सिर दर्द, पेट में मरोड़ व दस्त के मरीज अधिक आ रहे। रोजाना आठ से 10 मरीज ओपीडी से भर्ती हो रहे। इससे मेडिकल वार्ड भी फुल चल रहा है। यहां, 30 बेड आरक्षित किए गए हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, बच्चा वार्ड में 24 बेड निर्धारित हैं। बढ़ती संख्या देखते हुए पीआईसीयू में पांच बेड अतिरिक्त लगाए गए, फिर भी जगह कम पड़ गई। प्राथमिकता पर बेहद गंभीर बच्चों को ही भर्ती कर रहे हैं। जिनकी हालत ज्यादा गंभीर नहीं है, उन्हें दवा और परामर्श दिया जा रहा है। वार्ड में अतिरिक्त बेड डालने की जगह भी नहीं बची है। इसलिए अभिभावकों की सहमति लेकर एक बेड पर दो-दो बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है। बच्चे छोटे हैं, इसलिए बेड पर दो बच्चे भर्ती हो सकते हैं। बच्चों की संख्या बढ़ने से तीमारदार भी काफी संख्या में आ रहे, इससे बेंच कम पड़ जा रहे। सोने-बैठने तक की जगह नहीं मिल पा रही, ऐसे में लोग फर्श पर बैठक कर समय व्यतीत कर रहे हैं। एसआईसी जिला अस्पताल डॉ. खालिद रिजवान ने बताया कि तेज गर्मी के दौरान खानपान में जरा सी अनदेखी सेहत बिगाड़ सकती है। दूषित पानी से बच्चों में उल्टी-दस्त और संक्रमण के मामले बढ़ने की आशंका रहती है। गर्मी में तपने के बाद घर लौटने पर या बाजार में शीतल पेय पदार्थ सेवन से सांस संबंधी रोग भी बढ़ रहे हैं।
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इमरजेंसी में रोजाना आ रहे 70 से 80 मरीज
गर्मी के चलते इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की संख्या बढ़कर रोजाना 70 से 80 पहुंच गई है। सोमवार को 68, रविवार को 58, शनिवार को 64, शुक्रवार को 74, बृहस्पतिवार को 67, बुधवार को 64 और मंगलवार को 61 मरीज इमरजेंसी में आए। भर्ती हुए। उपचार के बाद अलग वार्ड में भेजा गया। वहीं, तमाम ऐसे भी मरीज आए, जिन्हें प्रारंभिक उपचार देकर इमरजेंसी से ही घर भेज दिया जा रहा है, या फिर ओपीडी में चिकित्सीय परामर्श के बाद घर भेज दिया जा रहा है।
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बचाव के उपाय
- बच्चों को उबला या साफ पानी पिलाएं। बाहर का खुला, बासी भोजन न दें।
- हाथ साफ रखें। तेज धूप में बच्चों को न भेजें। ओआरएस और पर्याप्त पानी दें।
- सांस लेने में तकलीफ, तेज बुखार या उल्टी-दस्त होने पर डॉक्टर को दिखाएं।
- शीतल पेय पदार्थ का सेवन करने से बचें। ज्यादा तली-भुनी हुई चीजें न खाएं।
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ओपीडी में एक सप्ताह में आए मरीजों की संख्या पर एक नजर
सोमवार को 1162
मंगलवार को 847
बुधवार को 778
बृहस्पतिवार को 750
शुक्रवार को 992
शनिवार को 612
सोमवार को 985
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बोले तीमारदार
अस्पताल में आने वाले मरीजों की समय से जांच नहीं हो पा रही है। चिकित्सक समय से नहीं बैठते। पर्चा बनवाने के बाद परामर्श और जांच में पूरा दिन बीत जा रहा है। कभी-कभी दवा काउंटर बंद हो जाता है। यदि व्यवस्था में सुधार हो तो आसानी होगी।
रमाशंकर मिश्र, तीमारदार, पुरानी बस्ती
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बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर उसे वार्ड में भर्ती कराए हैं। अभी तक उपचार ठीक से हुआ है। बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज हुई, इससे समस्या हो रही है। बेंच न होने पर अक्सर लोग फर्श पर बैठ जा रहे हैं। बेड और संसाधन बढ़ाए जाने चाहिए।
हुकुम, तीमारदार, वाल्टरगंज, बस्ती।
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गर्मी के चलते मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इमरजेंसी में दस्त के अधिक मरीज आते हैं। प्रारंभिक उपचार के बाद कंडीशन ठीक रहने पर इमरजेंसी से दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया जा रहा है। बेड पर्याप्त है। दवा व संसाधन भी है। चिकित्सकों व स्टाफ को अलर्ट पर रखा गया है। आठ बेड का कोल्ड रूम बना है। छह बेड अतिरिक्त में है।
डॉ. खालिद रिजवान अहमद, एसआईसी, जिला अस्पताल, बस्ती।
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