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Basti News: ढूंढ़े नहीं मिल रही फाइल...रानी लक्ष्मीबाई आर्थिक सहायता का बढ़ा इंतजार

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बस्ती। जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण बड़ी संख्या में पीड़िताओं को रानी लक्ष्मीबाई सम्मान कोष का लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रोबेशन विभाग के बीच में उलझी फाइल आगे नहीं बढ़ रही है। इसका खामियाजा पीड़िताओं को भुगतना पड़ रहा है।
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जानकारी के अनुसार, शासन की ओर से लक्ष्मीबाई महिला और बाल सम्मान कोष योजना के तहत पीड़िताओं ने आवेदन किया था, लेकिन एक दर्जन से अधिक पीड़िताएं ऐसी हैं जिनकी मेडिकल जांच रिपोर्ट की पत्रावलियां स्वास्थ्य विभाग में ढूंढ़े नहीं मिल रहीं।
इससे पीड़िताओं को मिलने वाला आर्थिक मदद का इंतजार बढ़ता रहा है। बताया गया कि इसमें से तमाम मामले ऐसे हैं जिसमें चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और सभी औपचारिकताएं पूरी हो गई हैं। फिर भी जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। मामला अब फंसा है कि एक दर्जन पीड़िताओं की फाइल की ऑनलाइन फीडिंग नहीं हुई है।
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जिसके बाद शासन ने इसे गंभीरता से लिया और सीएमओ बस्ती को पत्राचार कर फीडिंग के लिए निर्देशित किया है। जब संबंधित नाम का मिलान और फीडिंग के लिए फाइल ढूंढ़ने लगे तो कई फाइल न तो सीएमओ कार्यालय में मिल पा रही, और न ही जिला महिला अस्पताल में। इससे फीडिंग कार्य लंबित है। चूंकि, अधिकांश मेडिकल परीक्षण कार्य महिला अस्पताल में ही होता है। बताते हैं कि इसमें स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार इस समय उलझे हुए हैं। शासन की ओर से संचालित इस योजना के तहत यौन शोषण, एसिड अटैक, पॉक्सो एक्ट और दहेज हत्या जैसी घटनाओं की शिकार महिलाओं और बच्चियों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए शुरू की गई है।
संबंधित विभागों की लापरवाही के कारण इन पीड़िताओं को राहत के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना के तहत पीड़ित महिलाओं और बच्चियों को इलाज, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। इस योजना के तहत पीड़ितों को आर्थिक सहायता मिलती है।
इसका उद्देश्य उन्हें शिक्षा जारी रखने, रोजगार स्थापित करने और एक नई जिंदगी शुरू करने में मदद करना है। योजना के अनुसार, जब किसी पीड़िता के मामले में पुलिस जांच पूरी हो जाती है और न्यायालय में चार्जशीट दाखिल हो जाती है तो उसे इस कोष से आर्थिक सहायता दी जाती है। पीड़िताओं और उनके परिजनों का कहना है कि महीनों से अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें टाल दिया जाता है। बताया गया कि नाम में भी भिन्नता है। इस त्रुटि का दंश पीड़िताएं झेल रही हैं।
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