फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कर्बला के बाद यजीदियों का अंजाम, इतिहास में दर्ज हैं सबक : मौलाना मुनव्वर

विज्ञापन
नगर बाजार मे तकरीर को संबोधित करते मौलाना मुनौव्वर हुसैन-स्रोत आयोजक
विज्ञापन
नगर बाजार। नगर पंचायत नगर बाजार स्थित मदरसे में मुहर्रम की नौवीं तारीख को आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना मुनव्वर ने कर्बला की घटना और उसके बाद के ऐतिहासिक परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कर्बला केवल एक युद्ध नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और इंसाफ के लिए दी गई महान कुर्बानी का प्रतीक है।
विज्ञापन

मौलाना मुनव्वर ने कहा कि 10 मुहर्रम 61 हिजरी (680 ईस्वी) को हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों को कर्बला के मैदान में शहीद कर दिया गया था। इस घटना के बाद यज़ीद बिन मुआविया की सत्ता को लगातार विरोध, असंतोष और विद्रोहों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि मदीना में वाकया-ए-हर्रा और मक्का में हुए संघर्षों ने उमय्यद शासन की नींव को कमजोर कर दिया।
उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि कर्बला में अत्याचार का समर्थन करने वाले अनेक लोगों को बाद में राजनीतिक, सामाजिक और सैन्य चुनौतियों का सामना करना पड़ा। वहीं इमाम हुसैन की शहादत ने पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि अन्याय और जुल्म के सामने झुकना नहीं चाहिए, चाहे इसके लिए कितनी भी बड़ी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े। मौलाना मुनव्वर ने कहा कि यज़ीद का शासनकाल अधिक समय तक नहीं चला और 683 ईस्वी में उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उमय्यद शासन लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता और विरोध आंदोलनों से जूझता रहा। उन्होंने कहा कि कर्बला का संदेश आज भी मानवता को सत्य, न्याय, धैर्य और सिद्धांतों की रक्षा के लिए प्रेरित करता है।
विज्ञापन

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानियों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर हाफिज नूर आलम, शाबान इदरीशी, नियाज इदरीशी, मुनौव्वर हुसैन, डॉक्टर फारूक, मो वारिस, मो आरिफ, जमील अहमद, फिरोज अहमद, कलीमुल्लाह अंसारी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें