रुधौली। छपिया सुबरन में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन राघव ऋषि ने जड़भरत प्रसंग का समापन किया। कहा कि समग्र सृष्टि भगवान श्रीहरि की है।
सृष्टि का नियंत्रण करने के लिए मृत्युलोक में भगवान ने अपने सात प्रत्यक्ष ग्रह रूपी पार्षदों को नियुक्त किया है जो प्रतिक्षण मनुष्य को संचालित करते हैं। उन्होंने भगवान को बिंब और जीव प्रतिबिंब बताया।
जिस प्रकार धरती पर 70 प्रतिशत पानी है उसी तरह हमारक शरीर में 70 प्रतिशत पानी है। प्रत्येक पूर्णिमा पर जब पृथ्वी के सबसे नजदीक चंद्रमा रहता है तब समुद्र में ज्वार-भाटा आता है। यदि धर्म की मर्यादा में रहकर जीव जीवन यापन करता है तो उसे सुख व अंत में मुक्ति प्राप्त होती है।
इस दौरान गोरखनाथ मिश्र, सर्वश्री रविशंकर मिश्र, संतोष मिश्र, अभिषेक मिश्र, अशोक मिश्र, ओमप्रकाश मिश्र, शिवप्रकाश मिश्र आदि मौजूद रहे।