संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर के दक्षिण स्थित पुराने अमहट घाट पुल को गिरे सात वर्ष से अधिक हो चुका है। नए पुल को तैयार हुए पांच वर्ष से ज्यादा समय गुजर गया। मगर पुराने पुल का मलबा अभी भी नदी में पड़ा है। इससे नदी की अविरल धारा तो अवरुद्ध हो ही रही है, छठ पूजा जुटने वाले श्रद्धालुओं को भी खटक रहा है।
छठ पूजा के लिए वेदी तैयार करने पहुंचे आवास विकास कॉलोनी नित्यानंद कहते हैं कि विभाग के अधिकारी ही नहीं घाट पर पहुंचने वाले जन प्रतिनिधि भी इसे नजरअंदाज करके चले जाते हैं। भूअर निवासी राधिका सिंह बताती हैं कि हर साल वे परिवार के साथ छठ पूजा में आती हैं। हर बार नदी में गिरे पुल का हिस्सा दिखने पर पीड़ा होती है।
वर्ष 2017 में पुल से एक मोरंग लदा ट्रक गुजर रहा था, तभी पुल का एक बड़ा हिस्सा नदी में गिर गया।
हादसे में ट्रक भी नदी में जा गिरा। पुल निर्माण के लिए स्थानीय लोगों के अलावा जन प्रतिनिधियों के आंदोलन के बाद नए पुल का निर्माण करा दिया गया। लेकिन जिम्मेदार पुराने पुल का मलबा हटाना भूल गए। मलबे में कूड़े के ढेर भी फंसे हुए हैं। इससे जल दूषित हो रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता मनमोहन श्रीवास्तव काजू कहते हैं कि कुआनो को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए लगातार संघर्ष किया जा रहा है। नदी की धारा को यह मलबा अवरुद्ध कर रहा है। यदि जल्द मलबा नहीं हटाया गया, तो आंदोलन किया जाएगा। अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा उनके व बाकी साथियों की ओर से समय-समय पर नदी की सफाई की जाती है, यह मलबा नदी की सफाई में बड़ा रोड़ा है।
पर्यावरण प्रेमी व सेवानिवृत्त शिक्षक चंद्रशेखर उपाध्याय बताते हैं कि नदी प्राकृतिक रूप से खुद को स्वच्छ करती है, ज्यादा दिनों तक मलबा नदी में पड़ा रहने से इसका जल दूषित होगा। इससे जलीय जीवों के जीवन पर भी संकट उत्पन्न हो जाएगा। ऐसे में मलबे को जल्द हटा देना चाहिए।