बस्ती। विकास भवन के सीवीओ कार्यालय में एक बड़ी एलईडी स्क्रीन लगी है। इसे उन गोआश्रय स्थलों व वृहद गो संरक्षण केंद्र से जोड़ा गया है, जहां सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं। सीवीओ अपने कार्यालय में बने कंट्रोल रूम में बैठकर एलइडी स्क्रीन के जरिये गो-आश्रय स्थलों की निगरानी कर रहे हैं। बताते हैं कि इसके बावजूद भी बीमार पशुओं की हकीकत सामने नहीं आ पा रही है। इसमें भी खेल का अंदेशा है।
बता दें कि अस्थायी गो-आश्रय स्थलों, वृहद गो संरक्षण केंद्र, गोशालाओं में संरक्षित गोवंशों के मृत्यु, उनके शव परिसर में ही पड़े रहने, उनके बीमार होने व उन्हें केवल भूसा ही खिलाने की खबरें आए दिन मिलने पर शासन ने इन्हें सीसीटीवी कैमरे की नजर में रखने का निर्देश दिया। ऐसे में जिन ग्राम पंचायतों में गो-आश्रय स्थल, गोशाला या वृहद गो संरक्षण केंद्र संचालित है, उनके प्रधान व सचिव को वहां सीसीटीवी कैमरा लगवाने का निर्देश दिया।
इन दिनों संबंधित ग्राम पंचायतों द्वारा सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। अब तक 63 में से 55 से अधिक गो-आश्रय स्थल व एक वृहद गो संरक्षण केंद्र में सीसीटीवी कैमरे लगवाए जा चुके हैं। पांच कांजी हाउस में अभी कैमरा नहीं लगा है। बताया गया कि इनके लगने के बाद गो आश्रय स्थलों में होने वाली एक एक गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय में कंट्रोल रूम बनाया गया है जहां एलईडी स्क्रीन पर सीसीटीवी कैमरे से सुसज्जित गो आश्रय स्थलों की लाइव तस्वीरें देखी जा रही है। कहीं-कहीं कैमरा आड़ा-तिरछा लगवा दिए हैं, इससे पशु नहीं दिखते हैं।
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इन गो-आश्रय स्थलों पर लगवाए जा चुके हैं सीसीटीवी कैमरे
कप्तानगंज ब्लॉक के पोखरा, मेढऊवा, सड़वलिया, दुबौलिया के मसहा, बरदिया कुंवर, छपिया, सवई परसन, मरवटिया, सिंहा राजा, समौढा, हर्रैया के केशवपुर, बसुदेवा कुंवर, बरहपुर, विक्रमजोत के रूपगढ, दबौली दुबे, मल्हनी, मल्लूपुर, मेढइया शुक्ल, साऊंघाट के मझौवाजगत, भीटारामसेन, बस्ती सदर के चितरगड़िया, भौसिंहपुर, कुदरहा के सिकंदरपुर, सिसई बाबू, उजियानपुर, शिवपुर, बहादुरपुर के सेमरा गलवा, कनैला, लोनहा व रुधौली के बजहा ग्राम पंचायत में स्थित गाे-आश्रय स्थल व सदर के वृहद गो संरक्षण केंद्र कोइलपुरा आदि में सीसी टीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं।
कोट
गो-आश्रय स्थलों,गोशालाओं व वृहद गो संरक्षण केंद्र की सीधी निगरानी के लिए कार्यालय में कंट्रोल रूम स्थापित कर एक एलईडी स्क्रीन लगाई गई है। इसके माध्यम से संरक्षित गोवशों व वहां की व्यवस्थाओं पर नजर रखी जा रही है। कैमरे लगाने का खर्च ग्राम पंचायतें उठा रहीं हैं। आड़ा-तिरछा कैमरा नहीं लगा है। हवा के चलते कभी-कभी दिक्कत आती है, उसे फिर सही करवा दिया जाता है।
-डाॅ. अरुण कुमार गुप्ता, सीवीओ, बस्ती।