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शहर सुलगता रहा, पुलिस बनी रही तमाशबीन

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बस्ती में एडीजी आशुतोष पांडेय ने रोडवेज चौकी का किया निरीक्षण। - फोटो : BASTI
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शहर सुलगता रहा, पुलिस बनी रही तमाशबीन
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एडीजी अभियोजन ने माना, ध्वस्त रही पुलिस व्यवस्था
बस्ती। भाजपा नेता आदित्य नारायण उर्फ कबीर तिवारी की हत्या और इसके बाद शहर में हुए उपद्रव को शासन ने गंभीरता से लिया है। सूबे के एडीजी (अभियोजन) आशुतोष पांडेय को जांच के लिए बस्ती भेजा और रिपोर्ट तलब की है।
बृहस्पहितवार सुबह यहां पहुंचे एडीजी ने आईजी आशुतोष कुमार के साथ उस सभी स्थानों पर गए, जहां बुधवार को अराजक तत्वों ने तोड़फोड़ और आगजनी की। रोडवेज पुलिस चौकी और बस अड्डा परिसर का जायजा लिया। आसपास के लोगों से जानकारी लेने के बाद एडीजी सर्किट हाउस पहुंचे। जहां बस्ती के भाजपा सांसद हरीश द्विवेदी की अगुआई में भाजपा विधायक रवि सोनकर समेत पार्टी कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों ने घटना क्रम को विस्तार से बताया। इसी दौरान भाजपा नेताओं का समूह सर्किट हाउस पहुंचा और एसपी और कोतवाल को हटाने की मांग करने लगा। एडीजी ने पत्रकारों से बातचीत में माना कि जिला पुलिस तत्परता से कदम उठाती तो चीजें शार्ट आउट की जा सकती थीं। कई मौकों पर पुलिस अधिकारियों ने सूझबूझ से काम नहीं लिया। एडीजी ने बताया कि शासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए उन्हें यहां जांच के लिए भेजा है। वह घटना के सभी पहलुओं की छानबीन कर जल्द ही डीजीपी को रिपोर्ट सौंपेंगे। माना जा रहा है कि इसके तत्काल बाद पुलिस महकमे के कुछ अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
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सांसद ने कहा, मेरे बुलाने पर पहुंचे एसपी
सांसद हरीश द्विवेदी ने एसपी पंकज कुमार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए एडीजी से कहा कि शहर में हालात बेहद तनावपूर्ण थे, मगर एसपी फोन करने के बाद कोतवाली पहुंचे। इसकी भी जांच की जानी चाहिए। सांसद ने कहा कि शहर तथा आसपास व्यक्ति विशेष ने 25 बीघे से अधिक जमीन पर कब्जा कर रखा है। उसकी जांच करने के बजाय पुलिस दूसरे बिंदुओं पर भटकाती रहती है। कहा कि प्रतिमा विसर्जन के दिन अमोढ़ा कस्बे में सड़क पर मांस के टुकडे़ मिलने से उपद्रव और आगजनी शुरू हुई, मगर पुलिस-प्रशासन नाकाम रहा। छह दुकानें जला दी गईं। कई दुकानों में तोड़फोड़ हुई।
कबीर को गुंडा करार देती रही पुलिस
महादेवा विधायक रवि सोनकर ने कहा कि घटना के कारणों की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति बनाई जाए। भाजपा नेता प्रमोद पांडेय, भाजपा के नगर मंत्री आशीष शुक्ला आदि ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। कहा कि कोतवाली पुलिस कबीर को गुंडा दर्शाने में मशगूल रही। कुछ दिन पहले भी हमला हुआ था, मगर संज्ञान नहीं लिया गया। प्रमोद पांडेय ने कहा कि पुलिस कबीर तिवारी को ही बार-बार गुंडा करार देने में तल्लीन रही। एक सप्ताह पहले भी एपीएन कॉलेज के गेट के पास हमला हुआ था, जिसकी एफआईआर करने से कोतवाल कतराते रहे। पुलिस की नजर में कबीर तिवारी ही विवाद करते थे।
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तकनीकी की मदद से खंगालेंगे कुंडली
शासन की तरफ से भेजे गए जांच अधिकारी अपर पुलिस महानिदेशक आशुतोष पांडेय ने पत्रकारों से कहा कि सीसीटीएनएस पद्घति से पुलिस अभियुक्तों के अपराध का ब्योरा खंगालेगा, ताकि पकड़े गए अभय तिवारी और अनुराग के आपराधिक इतिहास की पुष्टि हो सके। दोनों अभियुक्त असलहे के साथ पकड़े जा चुके हैं, लेकिन जिले का पुलिस प्रशासन अब तक घटना की तह तक पहुंचने में नाकाम है। निश्चित ही यह पुलिस की बड़ी विफलता है। सोशल मीडिया पर अभियुक्तों से पूछताछ का वीडियो वायरल होने को अत्यंत आपत्तिजनक बताते हुए एडीजी ने कहा कि यह घोर अनुशासनहीनता है, इसकी भी जांच की जाएगी कि पूछताछ का वीडियो वायरल कैसे हुआ।
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