बस्ती। खूंखार आवारा कुत्तों ने लोगों की नाक में दम कर रखा है। यह सबसे अधिक बच्चों और बुजुर्गों पर हमला कर रहे हैं। इनके आतंक से बच्चों ने गली-मोहल्लों में खेलना तक बंद कर दिया है। हालात यह हैं कि अभिभावकों को स्कूल वैन या फिर ई-रिक्शा तक बच्चों को छोड़ने और लाने जाना पड़ता है। अभी रविवार को कुत्ते ने मासूम पर हमला कर उसके चेहरे को नोच डाला था।
शहर ही नहीं, बल्कि इन दिनों गांव-गांव तक कुत्तों का आतंक है। झुंड बनाकर घूमने वाले आवारा कुत्ते लोगों को देखते ही भौंकने लगते हैं। यदि कोई सहम गया या फिर रुक तो उस पर हमला करने से भी बाज नहीं आते हैं। कुत्तों के भय से लोग रास्ता बदलने पर मजबूर हैं। इतना ही नहीं, कुत्तों के हाव-भाव से लगता है जैसे उन्होंने अपना एरिया बांट रखा है। यदि दूसरे एरिया के कुत्ते उनके एरिया में आ जाते हैं तो सब मिलकर उन पर टूट पड़ते हैं। यदि कोई कुत्तों की लड़ाई में टांग अड़ाने की कोशिश करता है तो वह बिन बुलाए मुसीबत मोल ले लेता है, फिर कुत्ते उसी को निशाना बनाने लगते हैं।
शहर के रंजीत कॉलोनी के संजय का कहना है कि कभी उनके कॉलोनी में छह-सात कुत्ते दिखते थे, अब तो इनकी लंबी फौज हो गई। ये कुत्ते न सिर्फ आतंक का पर्याय बने हैं, बल्कि कॉलोनी की सफाई व्यवस्था की चौपट कर रहे हैं। कूड़े-कचरे मुंह में दबाकर लाते हैं और आबादी वाले इलाके में छोड़ देते हैं। बेलवा डांडी मोहल्ले के संतोष का कहना है कि पहले लोग आवारा कुत्तों को खाना इसलिए देते थे कि रात में वह घर की हिफाजत करेंगे, मगर जब से हिंसक हुए हैं, लोगों ने कुत्तों से दूरी बनानी शुरू कर दी है।
कुत्तों का आतंक पॉश कॉलोनियों में भी है। सिविल लाइंस और न्याय मार्ग पर दिनभर कुत्ते धमा चौकड़ी करते दिख जाएंगे, जबकि इस रास्ते से जिले के अधिकारियों का भी आना-जाना है। सुप्रीम कोर्ट ने भी आवारा कुत्तों को पकड़ने का आदेश दे रखा है, मगर इस आदेश का यहां के अधिकारियों पर कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा है।
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जिला अस्पताल में रोज लग रहे रेबीज के 80 इंजेक्शन
एसआईसी डॉ. खालिद रिजवान अहमद के अनुसार, इन दिनों रोजाना 80 से अधिक रेबीज के इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं। पहले इनकी खपत 70 के आसपास थी। मौजूद समय में 1775 वॉयल एआरवी (एंटी रेबीज वैक्सीन) और एंटी सिरम वैक्सीन 30 वॉयल उपलब्ध हैं।
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असुरक्षित महसूस करने पर कर देते हैं हमला
मुख्या पशु चिकित्साधिकारी अरुण कुमार गुप्ता का कहना है कि यह मौसम कुत्तों की ब्रीडिंग का है। ऐसे में कुत्ते खुद और बच्चों के असुरक्षित महसूस होते ही लोगों पर हमला बोल देते हैं। सतर्कता से कुत्तों से बचा जा सकता है।
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अयोध्या के बंदर बस्ती में मचा रहे उत्पात
बंदरों का भी आतंक कम नहीं है। गांव से लेकर शहर तक इनकी भरमार है। घरों छतों, फुलवारी, क्यारी, परिसर, बरामदे हर जगह बंदर धमाल मचा रहे हैं। गांवों में खेत-खलिहान भी इनसे अछूते नहीं बचे हैं। बंदरों की वजह से सब्जी, फल आदि की खेती प्रभावित है। कई लोग तो अपने फार्म हाउस या किचेन गार्डन में बंदरों से सब्जी, फल, फूल की क्यारियों को इलेक्ट्रिक फेंसिंग (झटका संयंत्र) लगवा रखे हैं। इसके बाद भी बंदर कूद कर वर्जित स्थानाें पर पहुंचकर नुकसान पहुंचा रहे हैं। नगर बाजार के मोनू बताते हैं कि जब से अयोध्या को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए विकसित करने की मुहिम चली है, तभी बंदरों की संख्या में यहां इजाफा हो गया है। वहां पकड़ कर बंदरों को अयोध्या सीमा पार कर बस्ती में अक्सर छोड़ दिया जाता है।
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केस-1
हर्रैया थाना क्षेत्र के खैरी ओझा गांव निवासी रंजीत चौहान के सात वर्षीय बेटे शिवम चौहान पर रविवार की दोपहर में खेलते समय कुत्ते ने हमला कर दिया था। इससे उसके चेहरे पर कई जगह जख्मी हो गए थे। घायल मासूम को रविवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
केस-2
छावनी क्षेत्र के फतेपुर गांव की रहने वाली प्रमिला के घर मंगलवार की दोपहर में दो कुत्ते पहुंच गए और दो मासूमों पर झपड़ पड़े। एक बच्चा तो किसी तरह बच गया, मगर दो साल की बच्ची को कुत्तों ने लहूलुहान कर दिया।
कोट
कुत्तों और बंदरों के संरक्षण की अभी कोई व्यवस्था नहीं है। शासन से कोई नया दिशानिर्देश से नहीं मिला है। बस्ती में एनीमल बीलिंग सेंटर (एबीसी) की स्थापना अब तक नहीं हो पाई है। हालांकि, पिछले दिनों शहरी क्षेत्र से कुछ बंदरों को पकड़वा कर जंगल क्षेत्र में छोड़वा दिया गया था।
-आनंद गुप्ता, ईओ, नगर पालिका बस्ती