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सख्ती : कमी मिलने पर अस्पताल का पंजीयन होगा निरस्त

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बस्ती। मानक पर खरे न उतरने वाले निजी अस्पतालों पर अब और सख्ती बढ़ा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग अब केवल पंजीयन निरस्त नहीं करेगा बल्कि जुर्माना भी लगाएगा। न्यूनतम 10 हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक का अर्थदंड लगाया जाएगा। जुर्माना न देने पर विधिक कार्रवाई भी कराई जाएगी।
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एसीएमओ डाॅ. एसबी सिंह ने बताया कि क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 के तहत निजी अस्पताल में अगर कोई भी कमी पाई जाएगी तो कार्रवाई की जाएगी। जो भी अस्पताल वह चाहे इंफार्मेशन बोर्ड लगाने में हीलाहवाली करेंगे या फिर पार्किंग की व्यवस्था नहीं रहेगी तो पंजीयन निरस्त करने के साथ ही कमी के अनुसार अर्थदंड लगाया जाएगा। अस्पतालों को पंजीयन के सभी मानक पूरा करना होगा। पार्किंग, इमरजेंसी डोर, फायर एनओसी, स्टाफ भी मानक के अनुसार, साफ-सफाई व्यवस्था व बायोवेस्ट प्रबंधन भी होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर जांच में कमी पाई तो पंजीयन निरस्त कर दिया जाएगा। जुर्माना भी लगेगा। इतना ही नहीं जांच के दौरान कोई अस्पताल पंजीयन संबंधित कागजात नहीं उपलब्ध करा पाएगा तो 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाएगा।
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दूसरी बार जांच में भी अगर कागजात नहीं मिला तो दो लाख, तीसरी जांच में पांच लाख तक जुर्माना लग सकता है। बताया कि दक्षिण दरवाजा स्थित नूर हाॅस्पिटल का पंजीयन निरस्त हो गया था। 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया था। संचालक ने अर्थदंड को जमा कर दिया है।
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