बस्ती। बारिश, तेज धूप और उमस के बीच जिले में जलजनित और मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगा है। दूषित पानी के सेवन से पेट के संक्रमण, उल्टी-दस्त और बुखार के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। सबसे अधिक प्रभावित बच्चे और बुजुर्ग हैं। शनिवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 1114 मरीजों ने इलाज कराया, जिनमें वायरल संक्रमण और पेट संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या अधिक रही।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. एसडी ओझा ने बताया कि बारिश के मौसम में दूषित पानी के सेवन से पेट संबंधी संक्रमण तेजी से फैलता है। अस्पताल में आने वाले अधिकांश मरीज उल्टी, दस्त, पेट दर्द, ऐंठन और बुखार की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। कई मरीजों में कमजोरी और डिहाइड्रेशन की समस्या भी मिल रही है। संक्रमण की आशंका को देखते हुए चिकित्सक जरूरत पड़ने पर टाइफाइड और पीलिया की शुरुआती जांच भी करा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि उमस और तेज धूप के कारण अत्यधिक पसीना निकलने से कई मरीजों का रक्तचाप (बीपी) भी कम हो रहा है। वहीं सिरदर्द, चक्कर और तेज बुखार की शिकायत लेकर भी मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं।
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बारिश के पानी में तेजी से पनपते हैं बैक्टीरिया
मेडिकल कॉलेज बस्ती के फिजिशियन डॉ. बीएल कन्नौजिया ने बताया कि बारिश के मौसम में जल स्रोतों और पेयजल आपूर्ति लाइनों में लीकेज होने से सीवेज का पानी मिल जाने की आशंका बढ़ जाती है। नमी और तापमान के कारण पानी में हानिकारक बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। यही बैक्टीरिया पेट के गंभीर संक्रमण का कारण बनते हैं। उन्होंने कहा कि इस मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है।
बच्चों को उबला या शुद्ध पानी ही पिलाएं
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस पटेल ने सलाह दी कि बच्चों को केवल उबला या शुद्ध पानी ही पिलाएं। वाटर प्यूरीफायर अथवा क्लोरीन टैबलेट का उपयोग करें। खुले में बिकने वाले चाट-पकौड़े, कटे फल और अन्य अस्वच्छ खाद्य पदार्थों से बचें। भोजन से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोना जरूरी है। बदलते मौसम में थोड़ी सावधानी बरतकर पेट के संक्रमण और अन्य जलजनित बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।
कोट
जिला अस्पताल में सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध हैं। ओपीडी और इमरजेंसी में आने वाले प्रत्येक मरीज का समुचित उपचार किया जा रहा है।
-डॉ. अनिल कुमार, एसआईसी, जिला अस्पताल, बस्ती।