बनाई गई वैकल्पिक व्यवस्था, केएमसी वार्ड में रखे जा रहे बीमार बच्चे
बच्चों को लेकर बाहर निजी अस्पतालों में जा रहे तीमारदार, बढ़ी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पीआईसीयू और एसएनसीयू वार्डों में सुरक्षा मानक बढ़ाने से सरकारी अस्पतालों में हलचल बढ़ गई है। जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में विद्युतीकरण एवं मरम्मत कार्य शुरू कराया गया है। इस वजह से दो दिन से 18 बेड का एसएनसीयू वार्ड बंद कर दिया गया है। इससे नवजात शिशु भर्ती नहीं किए जा रहे हैं। वैकल्पिक व्यवस्था केएमसी में बनाई गई है। मगर, यह पर्याप्त नहीं है। कम वजन एवं शारीरिक रूप से कमजोर नवजात को निजी अस्पतालों में लेकर भागना पड़ रहा है। नवजात के इलाज में तीमारदार पर पांच से छह हजार रुपये प्रतिदिन का खर्च बढ़ गया है।
जिला महिला अस्पताल के सिक न्यूबार्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) वार्ड में प्रतिदिन औसतन दो से चार नवजात भर्ती किए जाते हैं। शारीरिक रूप से कमजोर शिशु को यहां तीन तरह की मशीनों पर रखकर इलाज किया जाता है। वार्मर, फोटोथेरेपी और सी-पैट मशीनों के जरिये कमजोर नवजात शिशु को मदद पहुंचाकर स्वस्थ बनाया जाता है। यहां भर्ती होने वाले बच्चे अमूमन तीन से सात या 10 दिन तक रखें जाते हैं।
इस व्यवस्था के चलते आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को नवजात के इलाज में काफी मदद मिल जाती है। प्रसव के बाद नवजात के इलाज में खर्च का बोझ नहीं उठाना पड़ता है। कुछ दिनों के बाद स्वस्थ जच्चा-बच्चा लेकर घर चले जाते हैं। इधर दो दिन से यह व्यवस्था ठप हो गई है। शासन के सख्त निर्देश के बाद इस वार्ड की विद्युत सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त कराई जा रही है। नए सिरे से वायरिंग एवं स्वीच बोर्ड आदि लगाने संबंधी कार्य चल रहा है। इसमें एक सप्ताह का वक्त लगेगा। इस वजह से अस्पताल प्रशासन को महिला अस्पताल के प्रथम तल पर संचालित एसएनसीयू वार्ड बंद करना पड़ा है।
वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में भूतल पर कंगारू मदर केयर यूनिट (केएमसी) में वार्मर मशीन लाकर शिफ्ट कराई गई है। यहां कुछ बच्चे भर्ती किए जा रहे हैं। सोमवार को कुल 9 नवजात शिशु इसमें भर्ती पाए गए। अस्पताल में मौजूद राधिका ने बताया कि उनकी ननद का प्रसव कराया गया है। नवजात की तबीयत खराब बताई गई, उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दो दिन में 10 हजार रुपये खर्च हो गए। कुछ अन्य तीमारदार भी नवजात की तबीयत बिगड़ने पर परेशान नजर आए।
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जांच में अपूर्ण मिला था विद्युत सुरक्षा का मानक
झांसी की घटना के बाद जिला महिला अस्पताल में प्रशासनिक टीम पहुंची थी। निरीक्षण के दौरान एसएनसीयू वार्ड में विद्युत सुरक्षा के इंतजाम मानक के अनुरूप नहीं पाए गए थे। इस वजह से विद्युतीकरण के कार्य को दुरुस्त कराया जा रहा है। वार्ड में विद्युत आपूर्ति बाधित होने से मशीनें भी बंद हैं। इस वजह से बच्चे भर्ती नहीं किए जा रहे हैं।
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अभी छह दिन और लगेंगे
एसएनसीयू वार्ड को संचालित करने में अभी छह दिन और लग जाएंगे। विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण होने के बाद इस वार्ड को पूरी तरह से सेनेटाइज किया जाएगा। वार्ड में इलेक्टि्रशियन एवं अन्य कारीगरों की आवाजाही से संक्रमण बढ़ने की आशंका हैं। ऐसे में विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण होने के बाद छिड़काव आदि का कार्य कराया जाएगा।
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कोट
एसएनसीयू वार्ड में विद्युत मरम्मत के कार्य कराए जा रहे हैं। इस दौरान बीमार नवजात को ओपेक चिकित्सालय कैली, जिला अस्पताल और सीएमओ के अधीन संचालित एनबीएसयू वार्डों के लिए रेफर किया जा रहा है। सामान्य बीमारी का इलाज आसानी से हो रहा है। एक सप्ताह के बाद यह समस्या खत्म हो जाएगी।
-डॉ. एके वर्मा, सीएमएस