पीसीएफ क्रय केंद्र चित्राखोर बनकटी में पसरा सन्नाटा।
बस्ती। धान खरीद अभियान को पलीता लग गया है। एक महीने बीतने के बाद भी अभी तक प्रगति नहीं आई। समूचे मंडल में केवल पांच प्रतिशत खरीद हुई है। जिम्मेदार बेफिक्र हैं। तमाम क्रय केंद्र अभी सक्रिय ही नहीं हुए। अधिकांश जगहों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। समर्थन मूल्य का उपहार पाने के लिए किसान मारा-मारा फिर रहा है। शादी और खेती का भार ऊपर से झेलना पड़ रहा है। किसान अपनी फसल बिचौलियों के हाथ बेचने को विवश है।
मंडल इस बार एक लाख 62 हजार एमटी धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित है। हर बार एक नवंबर से अभियान को गति मिल जाती रही। इस बार शुरूआत में ही यह अभियान पिट गया। किसानों के धान क्रय केंद्रों पर नहीं खरीदे जा रहे हैं। जानकार बता रहे हैं कि कुछ एजेंसियों के क्रय अभी भी कागजों में संचालित हो रहे हैं। बिचौलियों से सेटिंग करके धान खरीद का ग्राफ बढ़ाने की फिराक में जिम्मेदार खुद लगे हुए हैं।
बस्ती जिले में 50 हजार एमटी लक्ष्य के सापेक्ष अभी महज 3562.62 एमटी की खरीद हुई है। इसमें नोडल खाद्य एवं रसद विभाग ने 34 हजार एमटी लक्ष्य के सापेक्ष केवल 2641.98 एमटी की खरीद कर पाया है। पीसीएफ की स्थिति और खराब है। 10 हजार एमटी लक्ष्य के सापेक्ष महज 464.44 एमटी की खरीद हुई है। जबकि पीसीयू ने 66.36 और एफसीआई ने 88.48 एमटी खरीद की है।
वहीं संतकबीर नगर जिले में 40 हजार एमटी लक्ष्य के सापेक्ष 1989 एमटी और सिद्धार्थनगर में 72 हजार एमटी के सापेक्ष 2534 एमटी धान की खरीद की गई है। पूरे मंडल में महज पांच प्रतिशत धान की खरीद अभी तक हुई है।
किसानों का कहना है कि क्रय केंद्र संचालित न होने से उनकी उपज नहीं समर्थन मूल्य पर नहीं बिक पा रही है। किसान प्रति क्विंटल धान की उपज 600 से 700 रुपये घाटा सहकर 1700 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल बेचने को विवश है।