विक्रमजोत। सरयू नदी के जलस्तर में बढ़त बनी हुई है। पहाड़ी व मैदानी क्षेत्रों में लगातार बारिश होने से नदी ओवरफ्लो होने को आतुर है। रविवार को दिन भर जलस्तर में रुक- रुक कर बढ़ोतरी होती रही। इससे तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों में दहशत है।
माझा में पानी की दबाव अधिक होने के कारण और ठोकर के चलते जगह जगह कटान शुरू हो गयी है। माझा व निचले क्षेत्रों में पानी भरने लगा है। ग्रामीणों के सिर पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। विभागीय अधिकारी भी मान रहे हैं कि आगामी एक सप्ताह में नदी का जलस्तर और बढ़ सकता है। केंद्रीय जल आयोग अयोध्या कार्यालय के वाटर रीडर बलराम ने बताया कि रविवार की शाम करीब पांच बजे नदी का जलस्तर 92.50 मीटर रिकार्ड हुआ था।
यह खतरे के निशान 92.730 मीटर से महज 23 सेमी नीचे है। बाढ़ खंड प्रथम के एसडीओ धर्मेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि बारिश के दौरान नदी की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही। घघौवा बाढ़ चौकी पर दो जेई और दो सुपरवाइजर की ड्यूटी लगाई गई है। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयारी की गई है। कटान रोधी सामग्रियां भी संवेदनशीन जगहों के आसपास डंप है। फिलहाल अभी तटबंधों के रैंप और स्पर सुरक्षित है।
वहीं, एलवी तटबंध से सटे बाढ़ प्रभावित गांव भरथापुर, कल्याणपुर और संदलपुर सहित बीडी तटबंध से सटे कन्हईपुर खेमराजपुर, बड़ागांव, बेतावा, नरसिंहपुर, पकड़ी गांव के समीप बाढ़ का पानी पहुंच जाने से ग्रामीणों में दहशत है। उन्हें पिछले साल बाढ़ का मंजर याद आने लगा है। दुबौलिया संवाद के अनुसार नदी का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र के सुबिका बाबू गांव के लोग अपनी घर- गृहस्थी समेटने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के पानी से उनका गांव चारों तरफ से घिर जाता है। आवागमन नाव के सहारे होता है। एक समय ऐसा आता है जब गृहस्थी का सामान लेकर शरणालय जाना पड़ता है। इस बार उसी तरह के संकेत मिल रहे हैं।